कोटद्वार में आयोजित शरदोत्सव में गढ़वाली गीतों की प्रस्तुति देते कलाकार।
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कोटद्वार शरदोत्सव के दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या लोक गायक किशन महिपाल के नाम रही। किशन की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति पर लोग ठंड के बावजूद देर शाम तक झूमते रहे।
शनिवार को देर शाम आयोजित सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि हंस कल्चरल सेंटर के प्रदेश प्रभारी पदमेंद्र सिंह बिष्ट और गायिका सोनिया आनंद ने संयुक्त रूप से किया। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत लोक गायिका सरिता बैनोला ने गढ़ वंदना से की। उन्होंने देवी देवताओं की धरती मां देव दैणा हुयां.. स्तुति से की। इसके बाद उन्होंने धन भाग यो हमारा, देव भूमि हमरो पहाड़ा.. गीत की प्रस्तुति दी। इसके बाद लोक गायक किशन महिपाल ने गुरु वंदना और बदरीनाथ की वंदना से अपने गीतों का शुभारंभ किया। उन्होंने भाना है रंगीली भाना.., श्याली बंप्याली.., रानी खेता राम ढोला.., किंगर का झाला घुघती.., स्याली हो रंगीली स्याली.., फ्यूलड़िया त्वै देखिकी आंदु यु मन मां, तेरु मेरु साथ छई पैल्या जनम मां.. जैसे एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इससे पूर्व आशु कला समिति की संस्थापक सुमित्रा रावत की प्रस्तुति पर कलाकारों ने थड़िया चौंफला, मेला नृत्य, छपेली नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति दी। लोक गायिका सुमित्रा रावत ने छोले झुमको.., चल गैला कौथिक जयोला, मकरैणी का मेला हो..., पधानी लाली तीले धारू बोला.., फुर उड़िजा घुघुति आकाश मां... आदि गीतों की प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर नगर निगम की मेयर हेमलता नेगी, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी सहित निगम के पार्षद और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे।
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जारी- नरेश थपलियाल