कोटद्वार। जिंदगी और मौत से जूझ रहे किडनी के मरीजों को अब राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार में डायलिसिस से जिंदगी की सौगात मिलेगी। प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय ने अस्पताल में पीपीपी मोड में संचालित होने वाले डायलिसिस सेंटर को हरी झंडी दे दी है। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक सहित अन्य सभी स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। अब लोगों को महंगे दाम पर प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने होंगे। 12 जुलाई को इसका शुभारंभ किया जाएगा।
बेस अस्पताल कोटद्वार पौड़ी जिले की 80 फीसदी आबादी और उत्तरप्रदेश के नजीबाबाद और नगीना तहसील के अधिकतर मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करा रहा है। अस्पताल में लीथोट्रिप्सी, एमआरआई, सिटी स्कैन, डिजिटल एक्सरे, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर सहित आधुनिक इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से किडनी के मरीजों को बड़े शहरों में महंगे दाम पर इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा था।
गंगादत्त जोशी मार्ग निवासी मतलूब अहमद ने बताया कि वह 54 वर्षीय पत्नी कमरून निशा का पिछले दो साल से डायलिसिस करा रहे हैं। बेस अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से वह 2400 रुपये में एक बार प्राइवेट में डायलिसिस करा रहे हैं। बेस अस्पताल में सरकारी दरों पर डायलिसिस की सुविधा मिलने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना से भी जुड़ेगा डायलिसिस सेंटर
कोटद्वार। कोटद्वार बेस अस्पताल में डायलिसिस सेंटर को पीपीपी मोड में मनी माजरा चंडीगढ़ की कंपनी द्वारा संचालित किया जाएगा। शुरुआत में इसकी फीस 1200 रुपये रखी गई है, उसके बाद सेंटर को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना से भी जोड़े जाने की योजना है।
क्या होता है डयलिसिस
कोटद्वार। वरिष्ठ सर्जन डा. अरुण पांडे ने बताया कि डायलिसिस रक्त शोधन यानी ब्लड डिटॉक्सिफाई करने की एक प्रक्रिया है। गुर्दे हमारे शरीर में मौजूद गंदगी को बाहर निकालते हैं। शरीर के अंगों को ठीक से काम करने और शरीर में जरूरी पदार्थों का सामंजस्य बिठाने के लिए किडनी काम करती है, लेकिन, जब यही किडनी 70-80 प्रतिशत तक खराब हो जाती है तब परेशानी के लक्षण दिखने लगते हैं। किडनी के 80-90 प्रतिशत तक खराब होने पर डायलिसिस की जरूरत पड़ती है।
कहते हैं अधिकारी
स्वास्थ्य निदेशालय के निर्देश पर राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार में शुक्रवार से पीपीपी मोड में डायलिसिस केंद्र का संचालन शुरू किया जा रहा है। इसके लिए अस्पताल की ओर से पूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।
- डा. वीके शुक्ला, सीएमएस बेस अस्पताल कोटद्वार
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