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राज्य का अस्तित्व बचाने के लिए लड़नी होगी लड़ाई

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उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री दिवाकर भट्ट ने कहा कि सत्तासीन सरकारें राज्य निर्माण की अवधारणाओं और सपनों के अनुरूप राज्य का विकास नहीं कर पाई है और न पलायन पर ही रोक लगा पाई है। वर्तमान में राज्य के हालात ठीक नहीं हैं। यदि समय रहते सही निर्णय नहीं लिया गया, तो भावी पीढ़ी हमें इसके लिए कोसेगी।
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व्यापार मंडल सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट ने कहा कि देश के सभी 29 राज्यों में उत्तराखंड एक मात्र ऐसा राज्य है, जिसने राज्य प्राप्ति के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। कहा कि राज्य में 67 फीसदी भूभाग में वन है और एक किमी सड़क बनाने के लिए जहां केंद्र सरकार की अनुमति जरूरी है, वहीं डीएम को यह अधिकार दिया गया है कि वह अपने विवेक से 8.5 हेक्टेयर करीब 100 बीघा भूमि को डिस्पोजल कर सकते हैं। कहा कि पर्वतीय क्षेत्र की भूमि को भूूमाफिया से बचाने के लिए राज्य सरकार को धारा 371 का इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस पर भी सवाल खड़े किए, कहा कि विपक्ष कहीं दिख ही नहीं रहा है। दोनों राष्ट्रीय दलों ने राज्य को बर्बाद कर दिया है।
उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने मार्ग के निर्माण को लेकर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को नसीहत दी कि वे जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए लीपापोती की आदत छोड़ दे। इस मौके पर केंद्रीय महामंत्री महेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ नेता भगवती प्रसाद कंडवाल, पौड़ी जिला प्रभारी चौधरी बृजवीर सिंह, महानगर अध्यक्ष भोपाल सिंह रावत, यतेंद्र भट्ट, गुलाब सिंह रावत आदि मौजूद रहे।
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