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शिक्षा व्यवस्था पर ‘रिफंड’ की मार

Sun, 27 Nov 2016 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला काोटद्वार
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कल्‍चचर - फोटो : अमर उजाला
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श्रीनगर।  उत्तराखंड रंगमंच शताब्दी नाट्य महोत्सव में दूसरे दिन ‘रिफंड’ नाटक का मंचन किया गया, जो वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर चोट करने में सफल रहा।
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गढ़वाल विवि के चौरास प्रेक्षागृह में रविवार को धाद नाट्य मंडल की ओर से प्रस्तुत किए गए नाटक के माध्यम से विद्यार्थी, शिक्षक और शिक्षा प्रणाली को उजागर करते हुए बताया गया कि किस तरह आज शिक्षा पैसा कमाने का धंधा बनकर रह गई है।  ‘रिफंड नाटक मूल रुप से फ्रिट्स कैरेंथी द्वारा लिखित है। जिसका कैलाश कंडवाल ने हिंदी रूपांतरण किया है। कंडवाल के निर्देशन में कहानी के किरदारों ने सजीव अभिनय किया।  नाटक की कहानी स्कूल के पुराने विद्यार्थी के इर्द-गिर्द घूमती है। वह अपने स्कूल में अपनी फीस वापस लेने (रिफंड) आता है। उसका तर्क है कि स्कूल की पढ़ाई से उसे कोई ज्ञान नहीं मिला, जिसके चलते उसको नौकरी नहीं मिली।
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विद्यार्थी की बातों को बकवास मान कर पहले तो प्रधानाचार्य उसे भगाने की कोशिश करता है। जब उसे भगाने की कोशिश नाकाम रहती है, तो प्रधानाचार्य सभी  शिक्षकों को बुलाकर उसकी परीक्षा लेता है। शर्त रखी जाती है कि अगर वह फेल हो गया, तो फीस वापस हो जाएगी। इसके बाद परीक्षा शुरू होती है। शिक्षक छात्र से घुमा-फिराकर सवाल पूछते हैं, सवाल में ही उत्तर छिपा होता है। ताकि छात्र सही उत्तर दे और विद्यालय फीस देने से बच जाए। जबकि छात्र रिफंड के लालच मेें गलत उत्तर देता है, लेकिन शिक्षक जोड़-तोड़कर उस छात्र का पास कर देते हैं और इस तरह स्कूल प्रबंधन रिफंड करने से बच जाता है।  नाटक यह बताने में सार्थक रहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था पुरानी परिपाटी पर चल रही है। अयोग्य शिक्षक विद्यार्थियों का भविष्य चौपट कर रहे हैं। तो विद्यार्थी शिक्षक से बड़ा बनने के लिए अनुचित तरीके अपना रहे हैं। नाटक में कैलाश कंडवाल, मनोज रंसवाल, पंकज उनियाल, शीतल नैथानी, प्रताप सिंह, जगवीर चौहान और अभिषेक डोबरियाल ने भूमिका निभाई।
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