हिमालय दिवस पर दुगड्डा, कोटड़ी रेंज, सनेह के कुंभीचौड़, लैंसडौन और नैनीडांडा समेत कई विकासखंड और वन प्रभागों में गोष्ठी, रैलियों और पौधारोपण कर स्कूली छात्रों और वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों ने हिमालय को बचाने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि विकास की हर नीति में हिमालय की चिंता होनी चाहिए, अन्यथा उत्तराखंड के लोगों को केदारनाथ जैसी त्रासदी झेलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से हिमालय अछूता नहीं रह गया है। हाल में आई त्रासदियों से सबक लेने की जरूरत है।
लैंसडौन सिविल सोयम तथा कैंट विभाग द्वारा कैंट स्कूल में हिमालय दिवस के अवसर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रजातियों के 100 पौधों का रोपण करते हुए इनके संरक्षण का संकल्प भी लिया गया। इस मौके पर चर्चा - परिचर्चा में हिमालय क्षेत्र के संरक्षण का संकल्प लिया गया।
ग्लोबल वार्मिंग, सिकुड़ते ग्लेशियर, आसामान्य मौसम, सूखते जल स्रोतों पर छात्रों, शिक्षकों, वन अधिकारियों ने अपने विचार रखे। छात्राओं ने पर्यावरण से संबंधित लोकनृत्यों, लोकगीतों की प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। लैंसडौन भूमि संरक्षण वन प्रभाग के डीएफओ एके त्रिपाठी ने प्रतिभागी छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
दुगड्डा में रेंज अधिकारी आरके बत्रा के नेतृत्व में स्कूली बच्चों ने रैली निकालकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कोटद्वार के कुंभीचौड़ में जीआईसी के एनएसएस छात्र-छात्राओं ने रैली निकालकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। जीआईसी धोबीघाट में ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने के लिए सोलर ऊर्जा के अधिक से अधिक उपयोग पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रेंजर जेएस रावत ने की। सनेह क्षेत्र में कोटड़ी के रेंजर बीरेंद्र प्रसाद डोबरियाल की अगुवाई में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लालपानी में गोष्ठी का आयोजन किया गया। कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के सभी रेंज मुख्यालयों पर हिमालय दिवस पर स्कूलों में कार्यक्रम कर पौधारोपण किया गया। उपप्रभागीय अधिकारी एसपी सिंह ने छात्र-छात्राओं को हिमालय की महत्ता बताई।