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Kotdwar News: सीमांकन न होने से मालन नदी से हो रहा भू-कटान

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कोटद्वार। मालन नदी में राजस्व विभाग और वन विभाग की भूमि का सीमांकन (सरहद बंदी) न होने के कारण बाढ़ सुरक्षा दीवार नहीं बन पा रही है, जिससे हर साल बरसात में मालन नदी के तटीय इलाकों में लगातार भू-कटान हो रहा है। नागरिक मंच के प्रचार सचिव आरसी कोठारी ने दोनों विभागों की भूमि का सीमांकन कराने की मांग उठाई है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
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ज्ञापन में कहा कि मालन नदी में राजस्व विभाग और वन विभाग की भूमि का सीमांकन न होने के कारण कोटला, मवाकोट, गोरखपुर, नंदपुर, पदमपुर, शिवराजपुर और देवरामपुर में हर साल मालन नदी से लगातार भू-कटाव हो रहा है। कहा कि दोनों विभागों की भूमि के सीमांकन के लिए वह अब तक कई प्रार्थनापत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वन विभाग और तहसील प्रशासन इस मामले में उदासीनता बरत रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक भी इस बारे में संबंधित विभागों को दिशा निर्देश जारी कर चुकी है। कहा कि नदी की ओर से हो रहे भूकटाव से वन विभाग के जंगल को भी नुकसान पहुंच रहा है और जंगल नदी में तब्दील हो रहा है। कहा कि वन विभाग की ओर से भूकटान रोकने के लिए कई बार वनीकरण भी किया गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कहा कि दोनों विभागों के पास सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे हैं। नक्शे के हिसाब से सीमांकन होने के बाद भूकटान रोकने के लिए सुरक्षात्मक कार्य आसानी से कराए जा सकेंगे।
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