जिला अस्पताल में इमरजेंसी हालत में यदि कोई मरीज आता है तो उसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। कारण अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल अफसर का पद खाली पड़ा हुआ है। डाक्टर ओपीडी में मरीजों का चेकअप करते हैं।
ऐसे में आपातकालीन स्थिति में कोई मरीज आता है तो इलाज न होने की सूरत में उसे श्रीनगर ले जाने के अलावा कोई चारा नहीं है। मंगलवार को बेसुधी की हालत में पहुंचे कंडारी गांव के जोत सिंह को दो घंटे तक कोई आपातकालीन सुविधा नहीं मिली, जबकि मरीज का ब्लड प्रेशर लो था और शूगर भी बढ़ा हुआ था।
जब मरीज को इमरजेंसी में ले जाया गया तो वहां पर न तो उसका ब्लड प्रेशर चेक किया गया और न ही उसे एडमिट करने के लिए कोई बिस्तर दिया गया। शूगर की जांच के लिए सैंपल लेने के बाद मरीज को बाहर धूप में बिठा दिया गया।
मरीज की हालत खराब होते देख परिजन उन्हें मजबूरन श्रीनगर ले गए। बताया गया कि अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल अफसर न होने की सूरत में सीनियर डाक्टरों को ही इमरजेंसी भी संभालनी पड़ती है। इन डाक्टरों के पास पहले ही मरीजों की लंबी लाइनें लगी होती हैं। ऐसे में अस्पताल में यदि कोई गंभीर मरीज आता है तो किस तरह वह ओपीडी को छोड़कर एमरजेंसी संभालेंगे।
ईएमओ के दोनों पद पड़े हैं खाली
अस्पताल में ईएमओ के दो पद हैं, लेकिन दोनों पद लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं। एक पद अक्टूबर 2012 से खाली पड़ा हुआ है, जबकि दूसरा पद तो 11 सालों से खाली है। यही नहीं, अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी और अधीक्षक के पद भी खाली पड़े हैं।