पौड़ी में कलेक्ट्रेट परिसर के भू-लेख के रिकॉर्ड कक्ष की रद्दियां निकालते मजदूर।
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पहाड़ों में आगजनी की घटनाओं से प्रशासन सतर्क है। प्रशासन ने पुराने रिकार्ड कक्षों को आग से बचाने के लिए पुरानी फाइलों एवं रद्दी को कार्यालय कक्षों से हटाना शुरू कर दिया है।
जिले में मई माह के प्रथम पखवाड़े तक आग की सबसे अधिक 69 घटनाएं हुई हैं। यह पांच वर्षों में सर्वाधिक हैं। अग्निशमन विभाग के अनुसार वर्ष 2012 में आगजनी की 78 घटनाएं हुई हैं। वर्ष 2013 में 30, 2014 में 32, 2015 में 38 घटनाएं आगजनी से हुई हैं।
जिले में मई के प्रथम पखवाडे़ तक ही आगजनी की रिकार्ड तोड़ 69 घटनाएं हुई हैं। आगजनी की घटनाओं को लेकर प्रशासन गंभीर है। शनिवार को प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के भू-लेख भवन में कई वर्षों से कबाड़ में तब्दील हुई फाइलों व रद्दी को प्रशासन ने सफाई करनी शुरू कर दी है। भू-लेख कर्मचारी शैलेंद्र नेगी ने बताया कि पुरानी फाइलों व रद्दी के लिए टेंडर निकाला गया था। टेंडर के अनुसार रद्दी को कबाड़ में बेचा जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई वर्षों से कागज धूल और नमी से सड़ गए हैं। उनसे आग लगने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही भू-लेख कक्ष के समीप ही एक सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर रात को आग लग गई। घटना से भू-लेख का यह रिकार्ड कक्ष बाल-बाल ही बच सका। अपर जिलाधिकारी रामजी शरण शर्मा ने बताया कि जिले में इस बार आग की घटनाएं काफी हुई हैं। घटनाओं को देखते हुए कार्यालय में प़ुरानी व रद्दी में तब्दील हुई फाइलों को निकालकर कक्ष को साफ किया जा रहा है।