राजकीय मेडिकल कालेज के क्लीनिकल (नैदानिक) विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों/संकाय सदस्यों की कमी बनी हुई है। चिकित्सकों की कमी से छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन और बेस अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। कालेज के सामान्य चिकित्सा (जनरल मेडिसिन), बाल रोग, स्त्री रोग और प्रसूति विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। वहीं, टीबी एवं छाती रोग विभाग में तो एक भी चिकित्सक नहीं है।
वर्ष 2008 में स्थापित मेडिकल कालेज वर्तमान में विशेषज्ञ चिकित्सकों (परास्नातक)/संकाय सदस्यों की कमी से जूझ रहा है। जनवरी माह के बाद से यह स्थिति आई है। यहां के एक दर्जन से अधिक चिकित्सक दून मेडिकल कालेज या अन्यत्र चले गए।
चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से भी लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार भी आयोजित नहीं हुए हैं, जिसके चलते चिकित्सकों की भारी कमी हो गई है। इससे जहां बेस अस्पताल में चिकित्सकों पर वर्क लोड बढ़ गया है, वहीं मरीजों को भी दिक्कत हो रही है।
मसलन बाल रोग विभाग में एक प्रोफेसर और एक सीनियर रेजीडेंट चिकित्सक तैनात हैं। अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों को एनआईसीयू, ओपीडी और सामान्य वार्ड देखने पड़ते हैं। इसके अलावा कालेज में अध्यापन का कार्य अलग से है।
यह है प्रमुख विभागों की स्थिति स्वीकृत/कार्यरत
विभाग प्रोफेसर एसो. प्रो. असि. प्रो. एसआर
बाल रोग 1/1 1/0 2/0 2/1
जनरल मेडिसिन 1/1 3/0 4/2 4/0
स्त्री रोग 1/1 1/1 4/2 4/0
रेडियोडायग्नोसिस 1/0 2/1 2/0 2/0
टीबी एंड चेस्ट 1/0 0/0 1/0 1/0
रेडियोथेरेपी 1/1 1/0 2/0 3/0
कालेज में फैकल्टी और एसआर की नियुक्ति की कार्रवाई चल रही है। जल्द रिक्त पद भरे जाएंगे।
-प्रो. सीएमएस रावत, प्राचार्य मेडिकल कालेज