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ग्वालगढ़ गदेरे पर बनी सुरक्षा दीवार, बाढ़ का खतरा टला

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आपदाग्रस्त सत्तीचौड़ और मवाकोट में ग्वालगढ़ गदेरे से बाढ़ सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवार। - फोटो : KOTDWAR
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वर्ष 2017 से लगातार आपदा से प्रभावित सत्तीचौड़ और मवाकोट क्षेत्र में ग्वालगढ़ गदेरे के चैनलाइजेशन और दोनों ओर सुरक्षा दीवार बनने से बाढ़ का खतरा टल गया है। सिंचाई विभाग ने ग्वालगढ़ गदेरे के दोनों ओर 200मी सुरक्षा दीवार का निर्माण किया है। क्षेत्रवासी लंबे समय से सुरक्षा दीवार बनाने की मांग कर रहे थे। अमर उजाला ने इस खबर को लगातार प्रमुखता से उठाया था जिससे ग्रामीणों की समस्या हो सका।
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पिछलेे 3/4 अगस्त, 2017 की रात कोटद्वार के जंगलों में बादल फटने से ग्वालगढ़ गदेरे ने पूरे इलाके में तबाही मचाई थी। जिसने सत्तीचौड़ और मवाकोट में घर, खेत और खलिहानों को भारी नुकसान हुआ था। मलबे के साथ आए भारी भरकम पेड़ और बोल्डरों से गदेरे का तल ऊंचा हो गया था। जिससे इन दोनों गांवों के रह रहे लोगों पर खतरा मंडरा रहा था।
सत्तीचौड़ निवासी चंद्रशेखर दुतपुड़ी, रमेश दुतपुड़ी, श्यामलाल, गणेश दुतपुड़ी, बलवंत सिंह भंडारी, योगराज और रवींद्र भंडारी का कहना है कि गांव में बाढ़ के खतरे को देखते क्षेत्रीय विधायक व मंत्री डॉ हरक सिंह रावत ने प्रशासन को गदेरे के चैनलाइजेशन व सिंचाई विभाग को बाढ़ सुरक्षा के इंतजाम करने के निर्देश दिए। विभाग की ओर से बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाए जाने से खेती की जमीन को बच ही गई है, इससे गांव में मलबा घुसने का भी डर खत्म हो गया है। मवाकोट निवासी पूर्व प्रधान सुरेश रावत, बच्चू गौड़, शिब्बू रावत, संदीप रावत और रणवीर असवाल का कहना है कि सुरक्षा दीवार बनने से क्षेत्रवासी अब बरसात के सीजन में चैन की नींद सो सकेंगे।
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