करोड़ों रुपये की लागत से बनी रामगंगा बांध परियोजना की कॉलोनियां अब खंडहर होने लगी हैं। सरकारी तंत्र इसकी अनदेखी कर रहा है। नागरिकों ने यूपी और उत्तराखंड के अधिकारियों से आवासीय भवनों को आम जनता को आवंटित करने और दूसरे राजकीय प्रयोग में लाने की मांग की है।
बता दें कि रामगंगा बांध परियोजना की कॉलोनियों में 1960 के दशक में उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग ने लगभग साढे़ पांच हजार राजकीय आवासीय-अनावासीय भवनों का निर्माण कराया था। 1974 में परियोजना का काम पूरा हो जाने के बाद यहां से कर्मचारियों की छटनी कर दी गई। इसकी वजह से आवास रिक्त होने लगे।
सैकड़ों परिवारों को जबरदस्ती हटाया
वहीं 1990 के दशक में केंद्रीय कॉलोनी से सैकड़ों परिवारों को जो यहां काबिज थे, बलपूवर्क हटा दिया गया। इन आवासीय भवनों का न तो वन विभाग ने ही कोई उपयोग किया और न ही सिंचाई विभाग ने। इसकी वजह से करोड़ों रुपयों से निर्मित ये मकान बर्बाद होते जा रहे हैं। जबकि कालागढ़ में बड़ी संख्या में भूमिहीन नागरिक निवास कर रहे हैं। जो कोटद्वार विधानसभा, पौड़ी लोकसभा के मतदाता हैं। उन्हें जिला आपूर्ति विभाग पौड़ी गढ़वाल ने राशनकार्ड आदि की सुविधा दे रखी है। इन आवासों पर आज भी अधिकार उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग का है। इसके कारण नागरिकों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से आवासों को जनता के नाम पर आवंटित करने की मांग की है। उधर, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए कहा कि मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है।