लैंसडौन। वीकेंड के दूसरे दिन शनिवार को भी लैंसडौन और आसपास का क्षेत्र पर्यटकों से गुलजार रहा। शुक्रवार और शनिवार को करीब आठ हजार से अधिक पर्यटकों के पहुंचने का दावा होटल एसोसिएशन ने किया है। होटल, रिजॉर्ट और होमस्टे फुल होने के कारण कमरों के लिए मारामारी रही। जगह नहीं मिलने पर बड़ी संख्या में पर्यटकों को वापस लौटना पड़ा।
शनिवार सुबह से ही पर्यटकों के वाहनों का लैंसडौन पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक जारी रहा। शुक्रवार को भी चार हजार से अधिक पर्यटक पहुंचे थे। होटल फुल होने के कारण कई पर्यटकों को रात वाहनों में गुजारनी पड़ी जबकि कई परिवारों को बिना ठहरे ही लौटना पड़ा। होटल कारोबारियों के अनुसार, पिछले दो दशकों में यह लैंसडौन में पर्यटकों की सबसे अधिक भीड़ मानी जा रही है।
लैंसडौन होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सतीजा और होटल जीएम एसोसिएशन के अध्यक्ष सक्षम खंडेलवाल ने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को आठ हजार से अधिक पर्यटक लैंसडौन व आसपास पहुंचे। क्षेत्र में पर्यटकों के ठहरने की क्षमता करीब चार हजार है। शनिवार को करीब एक हजार लोगों के चेकआउट के बाद उतने ही नए पर्यटकों को कमरे मिल सके। इसके बावजूद करीब तीन हजार पर्यटकों को वापस लौटना पड़ा।
अजय सतीजा ने बताया कि लैंसडौन से फतेहपुर, डेरियाखाल से ताड़केश्वर और जयहरिखाल से भैरवगढ़ी तक करीब 200 होटल, रिजॉर्ट और होमस्टे हैं। इनमें लगभग चार हजार पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था है। फतेहपुर से डेरियाखाल तक भी वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। इससे कोटद्वार से लैंसडौन पहुंचने में करीब पौने दो घंटे लगे। कोतवाली निरीक्षक रमेश तनवार के नेतृत्व में पुलिस की लगातार गश्त रही। पुलिस ने सड़क पर एकाध जगह को छोड़कर वाहनों की पार्किंग नहीं होने दी।