कोटद्वार। चौतरफा बढ़ते दबाव को देखते हुए लोनिवि दुगड्डा की ओर से बहुप्रतीक्षित मालन पुल के निर्माण में पूरी ताकत झोंक दी है। निर्माणाधीन पुल के 12 में से 8 पिलर आकार लेने लगे हैं। नए आठ पिलरों का काम पूरा होने पर इन पर स्लैब शिफ्ट कर दिए जाएंगे। इसके बाद 4 अन्य पिलरों को तोड़कर उनकी जगह वेल तकनीक के पिलर बनाने का काम शुरू होगा। चालू वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने मार्च तक पुल का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बीते वर्ष 13 जुलाई, 2023 को बाढ़ व भूकटाव से क्षतिग्रस्त हुए मालन नदी के पुल को टूटे हुए 16 महीने होने को हैं। अब तक दिसंबर, 2024 का लक्ष्य लेकर पुल निर्माण में जुटी लोनिवि दुगड्डा को इसके निर्माण के लिए तीन महीने का समय मिल चुका है। अब बरसात बीतने के बाद लोनिवि ने काम में तेजी ला दी है। बीती 15 अगस्त से क्षतिग्रस्त पुल के 5 स्लैब हटाकर वेल तकनीक पर पहले पिलर का निर्माण शुरू किया गया था। अब तक दो पिलरों का काम पूरा हो चुका है। छह पिलर भी आकार लेने लगे हैं। क्षेत्रवासियों की निगाह इस पुल के जल्द निर्माण पर टिकी है। दरअसल, मालन पार के आठ वार्डों के साथ ही लालढांग तक की करीब 50 हजार की आबादी, सिडकुल कर्मी, शिक्षक व कर्मचारी समेत सभी लोग रोजमर्रा के काम के लिए वैकल्पिक मार्गों पर परेशानी से आवाजाही कर रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो आठ पिलर जल्द तैयार कर इनमें पुराना ढांचा स्लैब शिफ्टिंग का काम शुरू कराया जाएगा। इसके बाद चार अन्य पिलरों का भी निर्माण शुरू होगा, जिनमें अभी तक पुराने स्लैब रखे गए हैं।
.
बनने हैं सभी 12 पिलर
आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिकों की ओर से मालन पुल पर बढ़ते वाहनों के दबाव, नदी के बहाव को देखते हुए पुल के सभी 12 पिलरों को वेल तकनीक से बनाने के लिए तैयार किए गए डिजायन व डीपीआर के हिसाब से काम हो रहा है। मालन पुल पर कुल 13 स्लैब थे। जिसमें एक स्लैब तब नदी में गिरने से टूट गया था। उसे नया बनाया जाएगा। बाकी 12 स्लैब को सुरक्षित हटाकर वेल तकनीक से पिलर बनाने का काम चल रहा है।
आईआईटी बीएचयू के डिजायन के अनुसार मालन पुल के पिलरों का वेल तकनीक पर निर्माण चल रहा है। वेल तकनीक से निर्माणाधीन दो पिलर बनकर तैयार हो गए हैं। 6 पिलर भी आकार लेने लगे हैं। 31 मार्च से पहले पुल तैयार कर दिया जाएगा।
-निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।