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Kotdwar News: मालन और सुखरो नदियों के किनारे बाढ़ सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू

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हर साल मानसून सत्र में बाढ़ और भू-कटाव झेलने वाले पदमपुर मोटाढांक और निंबूचौड़ खूनीबड़ के काश्तकारों को दिक्कतें नहीं झेलनी पड़ेगी। काश्तकारों की मांग पर सरकार ने संवेदनशील स्थानों पर वायरक्रेट और बाढ़ सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू करा दिया है।
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कोटद्वार भाबर में खोह, सुखरो और मालन प्रमुख नदियां हैं। इन नदियों के किनारे नगर निगम के 40 वार्डों में हजारों की आबादी रहती है। ज्यादातर ग्रामीण अंचल होने के कारण यहां काश्तकार खेती करते हैं। हर साल मानसून सत्र में ये नदियां बाढ़ से तबाही मचाती हैं जिसकी चपेट में नदियों के तट पर स्थित आबादी और खेत खलिहान आते हैं। बीते एक दशक में मालन नदी इन गांवों में कई बीघा खेती की जमीन लील चुकी है। इस बार राज्य सरकार ने यहां 600 मीटर के भूभाग में 21 वायरक्रेट बनाने के लिए पैसा मंजूर किया है। ग्रामीण हरेंद्र सिंह रावत, रोशनलाल कुकरेती, गणेश भट्ट, मदनमोहन जोशी व कल्याण सिंह नेगी का कहना है कि वायरक्रेट बनने से लोगों की खेती की जमीन बाढ़ की चपेट में नहीं आएगी।

उधर, निंबूचौड़ में सुखरो पुल से नीचे खूनीबड़ की ओर की जमीन को बाढ़ और भू-कटाव से बचाने के लिए 810 मीटर की सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जा रहा है। यहां उमेश नौटियाल समेत कई लोगों की कई बीघा खेती नदी में समा चुकी है। अब यहां सुरक्षा दीवार बनने से बाढ़ से सुरक्षा तो होगी ही क्षतिग्रस्त संपर्क मार्ग का भी निर्माण हो सकेगा।
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मालन और सुखरो नदी में बाढ़ एवं भू-कटाव की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील भू-भाग पर बाढ़ सुरक्षा के कार्य कराए जा रहे हैं। सिंचाई विभाग को पूरी गुणवत्ता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद खोह समेत अन्य स्थानों पर भी बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए जाएंगे। - ऋतु भूषण खंडूड़ी, क्षेत्रीय विधायक व विस अध्यक्ष उत्तराखंड।
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