जिला उपभोक्ता फोरम ने एक मामले में भवन निर्माण में लापरवाही बरतने और अनुबंध के अनुसार अधूरा निर्माण कार्य करने पर एक ठेकेदार को अपूर्ण कार्य के नुकसान रूप में भवन स्वामी को ढाई लाख रुपये का भुगतान करने या फिर भवन में अपूर्ण रहे कार्यों को दो महीने में पूरा करने के निर्देश दिए। उपभोक्ता फोरम ने अपने फैसले में ठेकेदार को मानसिक और शारीरिक क्षति के रूप में भवन स्वामी को 10 हजार रुपये का भुगतान करने के भी निर्देश दिए।
जिला उपभोक्ता फोरम के अनुसार जयहरीखाल निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार प्रताप सिंह असवाल ने चार नवंबर 2010 को बिहार के किशन गंज जिले में पड़ने वाले चोरकटटा कुरेला गांव निवासी सहेदुल रहमान लंबू ठेकेदार को अपने भवन निर्माण का ठेका 13,50,000 में दिया। सहेदुल रहमान लंबू ठेकेदार जयहरीखाल के ढौंढियाल मोहल्ले में रहता था। तब दोनों पक्षों के बीच सौ-सौ रु. के दो स्टांप पेपर पर यह अनुबंध किया गया। ठेकेदार की ओर से अनुबंध की शर्तों के विपरीत सेवानिवृत्त सूबेदार प्रताप सिंह असवाल से समय-समय पर कुल 13.74 लाख की राशि किए गए कार्य के आधार पर ली गई। करीब 1,91,771 रुपये का सामान भी मंगाया गया। ठेकेदार की ओर से समय पर भवन निर्माण न किए जाने पर प्रताप सिंह असवाल को अपनी बेटी का विवाह अन्यत्र करना पड़ा। इसके अलावा ठेकेदार ने उनसे दोबारा एक लाख रुपये उधार ले लिए, लेकिन इसमें से उन्हें 50 हजार की राशि ही लौटाई। 28 जनवरी, 2012 को गृह प्रवेश पर प्रताप सिंह असवाल को पता चला कि निर्माण में काफी लापरवाही बरती गई है। दस जुलाई 2013 को उन्होंने ठेकेदार के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। मामले में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष कंवर सेन, सदस्य विनोदानंद बड़थ्वाल, सदस्य दीप्ती भंडारी ने सुनवाई की।