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इलायची की खेती से कमाई हो रही दोगुनी

Tue, 01 Dec 2015 10:09 PM IST
पौड़ी
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उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इलायची की खेती बढ़ रही है। काश्तकार हर साल इससे लाखों रुपये कमा रहे हैं, लेकिन सरकारी विभागों का इस ओर ध्यान नहीं जा पाया।
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बड़ी इलायची के फलों का उपयोग ज्यादातर मसाले के रूप में किया जाता है। यह एक औषधीय पौधा भी है। इसका वैज्ञानिक नाम एलीटीरिया कार्डिमोमम है। इसे लार्ज कार्डियम, एमोनियम सिब्बूलेटम के नाम से भी जाना  जाता है। वर्तमान में बाजार  में यह 2200 से 2500 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भी इसकी खेती की अपार संभावनाएं हैं। यहां 1000 से 4500 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दल-दल और नमी वाली जगहों पर इसकी अच्छी खेती हो सकती है। थलीसैंण ब्लॉक में बुंगीधार क्षेत्र में आने वाले कांडई गांव के प्रगतिशील किसान बचीराम ढौडियाल, पौड़ी ब्लाक के खरकोटा गांव निवासी मातवर सिंह, उनियाल गांव निवासी फरसराम समेत कुछ काश्तकार इसकी खेती भी कर रहे हैं।
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प्रगतिशील काश्तकार बचीराम ढौडियाल तो पिछले करीब सात साल से इसकी खेती कर रहे हैं। इसकी खेती से हर साल चार से पांच लाख से अधिक आय अर्जित कर रहे हैं। वह इसके पौधे भी बेच रहे हैं। खरकोटा के मातवर सिंह ने भी अपने खेतों में इसके सैकड़ों पौधे लगाए हुए हैं।
इसकी फसल की बड़ी विशेषता यह है कि इसकी पौध को खेत में सिर्फ एक बार लगाना पड़ता है जो इसके बाद पौधे खुद फैलने लगते हैं।

उत्तराखंड में एक हजार से साढे़ चार हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दल-दल और अधिक नमी वाली जगहों में बड़ी इलायची की अच्छी खेती की जा सकती है।
-डॉ. नरेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी पौड़ी

-मैं पिछले साल साल से बड़ी इलायची की खेती कर रहा है। अभी तक करीब डेढ़ कुंतल उत्पादन होता है। अब पौधे बड़े हो गए हैं। उत्पादन बढ़कर अब ढाई से तीन कुंतल होने की सभावना है।
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-बचीराम ढौडियाल प्रगतिशील कास्तकार कांडई
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