लैंसडौन वन प्रभाग की सर्वाधिक दावाग्नि से प्रभावित रेंज दुगड्डा, लैसडौन और कोटद्वार रही है। मौजूदा समय में आग से फैल रहे जहरीले धुएं से मानव और निरीह वन्यजीव जंतुओं को प्रभावित हो रहे हैं। दुर्गम क्षेत्र में लगी आग पर नियंत्रण करना विभाग के लिय चुनौती है। डाडामंडी, कांडाखाल, पौखाल, घाड़ क्षेत्र और कोटद्वार भाबर से सटे हुये जंगलों में दावानल का प्रकोप जारी है। घाड़ क्षेत्र के बांज बाहुल्य क्षेत्र चरेख का डांडा दावानल से जल चुका है।
मालन का उदगम क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित है। लैंसडौन रेंज का अधिकांश मार्ग दावानल से नष्ट को चुका है। यही नहीं गौजेटा, ईड़ा के निकटवर्ती जंगल, चरेख धरगांव मोटर मार्ग के दोनों जंगलों में आग लगी है। वन विभाग के नियंत्रण के प्रयास धरातल में सफल नहीं हो रहे है। इस संबंध में एसडीओ एमके बहुखंडी ने बताया कि निरंतर दावानल की घटनाओं से वह स्वयं अचंभित है। शरारती तत्वों पर कड़ी नजर रखी जा रही हे। अग्नि नियंत्रण कि लिये विभाग का प्रयास जारी है।