कोटद्वार। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत कोटद्वार रेलवे स्टेशन के नए भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। मिट्टी कटान रोकने के साथ ही रेलवे स्टेशन क्षेत्र को सुदृढ़ और सुंदर बनाने के लिए रेलवे लाखों रुपये के बजट से पिचिंग कार्य भी करा रहा है। इसके लिए बोल्डर की पहली खेप रेलवे स्टेशन के यार्ड में पहुंच गई। वहीं, पिचिंग के लिए सुरक्षा दीवार का काम जारी है।
कोटद्वार रेलवे स्टेशन ब्रांच पर स्थित अंतिम रेलवे स्टेशन है। भौगोलिक दृष्टि से रेलवे स्टेशन का यार्ड क्षेत्र सीढ़ीनुमा है। यहां ऊपरी हिस्से में अमृत भारत स्टेशन योजना में नए भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। इससे करीब 20 से 25 फिट नीचे प्लेटफार्म और रेल ट्रैक है और इससे भी 20 फिट नीचे आबादी से सटे रेलवे के यार्ड की खाली भूमि है। वर्षाकाल के दौरान ऊंचे क्षेत्र से पानी सड़कों व नालों से तीव्र वेग के साथ रेलवे स्टेशन क्षेत्र से होकर बहता है। जिससे रेलवे स्टेशन यार्ड के सबसे निचले हिस्से में हर साल वर्षा काल में मिट्टी का कटान होता है। विगत वर्ष भी काफी मिट्टी कटान होने से रेल ट्रैक के लिए खतरा बढ़ गया था। हालांकि रेलवे ने रेत और मिट्टी के कट्टे कटान को अस्थायी रूप से रोक दिया था, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका था।
तीन माह पहले निरीक्षण के लिए आए डीआरएम ने रेल ट्रैक के निचले हिस्से में सुरक्षा दीवार के साथ पिचिंग कार्य करने के निर्देश दिए थे। रेलवे ने 70 लाख रुपये के बजट से पिचिंग कार्य को स्वीकृति दी थी। एक महीने से ज्यादा समय से काम जारी है। सुरक्षा दीवार का काफी हिस्सा बनने के साथ ही मिट्टी चढ़ाने का काम होने पर अब बोल्डर की खेप पहुंच चुकी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जल्दी ही पिचिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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पिचिंग से होकर बनेगा सीढ़ीनुमा रास्ता
लाइन पार आबादी क्षेत्र के लोग रेल ट्रैक पार कर गुजरते हैं। जिसे देखते हुए पिचिंग क्षेत्र में ही राहगीरों के लिए सीढ़ीनुमा रास्ता छोड़ा जाएगा।