बदरीनाथ में हृदय आघात से स्वर्गवासी हुए जगदीश टोडरिया के परिजन उनके अंतिम दर्शन नहीं कर पाए। इसकी वजह लामबगड़ में बरसात से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का बाधित होना है। उनके साथी शव को उनके मूल गांव सौड़ (देवप्रयाग) ला रहे थे, लेकिन उनको लामबगड़ से लौटना पड़ा। मजबूरन बदरीनाथ में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बदरीनाथ धाम में तीर्थ-पुरोहिताई करने वाले 45 वर्षीय जगदीश एक हफ्ते पहले बदरीनाथ गए थे। यहां जाने के तीन दिन बाद ही हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। जगदीश का परिवार ऋषिकेश में रहता है और अन्य परिजन पैतृक गांव सौड़ में।
बदरीनाथ में मौजूद उनके साथी उनका शव गांव ला रहे थे, लेकिन बदरीनाथ और जोशीमठ के बीच लामबगड़ में हाईवे बंद होने से उन्हें लौटना पड़ा। सड़क नहीं खुलने की संभावना को देखते हुए जगदीश का बदरीनाथ में ही दाह संस्कार कर दिया गया। जगदीश के भांजे सुनील सिल्सवाल का कहना है कि अचानक हुई इस घटना से पूरा परिवार सदमे हैं।
एक माह पूर्व हुआ था बड़े भाई का निधन
पिछले एक माह से जगदीश टोडरिया का परिवार झंझावत झेल रहा है। उनके बड़े भाई महेश (53 वर्ष) भी बदरीनाथ में पुरोहिताई करके अपने छह सदस्यीय परिवार का पेट पालते थे। जगदीश ऋषिकेश में प्राइवेट नौकरी कर रहे थे। एक माह पूर्व महेश की बदरीनाथ में अचानक तबियत बिगड़ गई।
जौलीग्रांट अस्पताल में उन्होंने आठवें दिन दम तोड़ दिया। महेश के इलाज के लिए उनके परिजनों ने लगभग ढाई लाख का कर्ज लिया। बड़े भाई की मौत के बाद जगदीश ने बदरीनाथ में पुरोहिताई संभालने का जिम्मा लिया। उनके तीन नाबालिग बच्चे हैं, लेकिन वह भी चल बसे। ऐसे में पूरे परिवार के आठ सदस्यों के समक्ष रोजी रोटी का संकट हो गया है।