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शहीद परमेंद्र का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

Thu, 25 Feb 2016 09:40 PM IST
कोटद्वार
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जम्मू और कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हुए रिखणीखाल के बगेडा गांव निवासी हवलदार परमेंद्र ध्यानी (38) का पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक घाट मंदाल नदी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। सेना की ओर से तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को बृहस्पतिवार सुबह कोटद्वार से उनके गांव बगेडा ले जाया गया। जहां परिजनों ने उनके अंतिम दर्शन किए।
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गांव से करीब तीन किमी दूर पैतृक घाट तक उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लेकर अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार के दौरान गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर लैंसडौन की टुकड़ी ने नायब सूबेदार सुमन कुमार की अगुवाई में सलामी शस्त्र, शोक शस्त्र और तीन चक्रों में 24 राउंड फायर कर अंतिम सलामी दी। शहीद का शव देखकर पूरा गांव फफक पड़ा, लेकिन गांव के बेटे द्वारा देश के लिए जान न्योछावर करने पर हर ग्रामीण गर्व महसूस कर रहा था। शहीद की पत्नी संगीता देवी पति का शव देखकर दहाड़ मारकर रोने लगी। दो बेटे प्रियांशु और हिमांशु के आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। जवान बेटे का शव देखकर पिता गोविंदराम ध्यानी का भी बुरा हाल था, लेकिन नियति को शायद यही मंजूर था।
शहीद का पार्थिव शरीर बुधवार दिन में जम्मू और कश्मीर से सेना के विशेष विमान से दिल्ली पहुंचा। जहां से सेना की विशेष एंबुलेंस से शव देर रात कोटद्वार मिलेट्री कैंप पहुंचा। बृहस्पतिवार तड़के चार बजे 31 राष्ट्रीय गढ़वाल और गढ़वाल राइफल्स के जवान पार्थिव शरीर को लेकर शहीद के गांव बगेडा पहुंचे। शव को थोड़ी देर के लिए अंतिम दर्शनों के लिए घर पर रखने के बाद सेना के जवान और परिजन श्मशान घाट तक ले गए। सैनिक सम्मान के बाद शहीद के दोनों बेटे प्रियांशु और हिमांशु ने शव को मुखाग्नि दी।
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इस मौके पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने शहीद को अंतिम सलामी दी। लैंसडौन के भाजपा विधायक दिलीप रावत ने शव पर पुष्प चक्र अर्पित किया। पूर्व सांसद ले. जनरल टीपीएस रावत (रिटायर्ड), सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी चंडी प्रसाद धूलिया, एसडीएम सोहन सिंह सैनी, ग्राम प्रधान जगदीश ध्यानी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
जम्मू कश्मीर से पार्थिव शरीर के साथ पहुंचे 31 राष्ट्रीय राइफल के नायक सूबेदार त्रिभुवन सिंह, हवलदार राम सिंह और मनोज रावत ने बताया कि हवलदार परमेंद्र ध्यानी छह माह पूर्व ही अपनी मूल यूनिट थ्री पैरा स्पेशल फोर्स से राष्ट्रीय राइफल में प्रतिनियुक्ति पर आए थे और जम्मू कश्मीर के तराल सेक्टर में तैनात थे। जहां आतंकी हमले में शहीद हो गए।
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