लंपी बीमारी ने भाबर क्षेत्र में पांव पसार लिए हैं। लोगों की मानें तो मरने वाले पशुओं की संख्या 100 के पार पहुंच चुकी है जबकि पशु पालन विभाग के आंकड़ों में करीब 24 पशु ही मरे हैं।
कोटद्वार भाबर में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन से जुड़े हैं। पशुपालन विभाग के पास दवाई और स्टाफ दोनों की कमी का खामियाजा पशुपालक भुगत रहे हैं। सनेह पट्टी केलालपानी, पदमपुर सुखरो, मवाकोट, मोटाढांक और हल्दूखाता पट्टी के लोग परेशान हैं।
लालपानी निवासी संजय सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सालयों में दवाई नहीं मिल रही है। कोटद्वार शहर समेत भाबर के 73 गांवों में पशु चिकित्सालय के नाम पर कोटद्वार और कलालघाटी में दो चिकित्सालय हैं। यहां पशुधन प्रसार अधिकारियों के माध्यम से टीकाकरण होने के दावे किए जा रहे हैं। सच तो ये है कि कई गांवों में अभी डॉक्टर तो दूर फार्मेसिस्ट और पशुधन प्रसार अधिकारी भी नहीं पहुंच पाए हैं।
अकेले कोटद्वार भाबर में तीन हजार से अधिक पशु बीमारी की चपेट में बताए जा रहे हैं। भाबर क्षेत्र में सर्वाधिक संक्रमण के बावजूद यहां अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है न ही टीकाकरण की टीम भेजी गई। सबसे बुरा हाल कोटद्वार चिकित्सालय से जुड़े गांवों में हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने जिले से अतिरिक्त स्टाफ व डॉक्टरों को यहां तैनात करने के निर्देश दिए थे लेकिन ऐसा भी नहीं हो पाया।
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जिले में उपलब्ध संसाधनों से बेहतर उपचार की व्यवस्था की जा रही है। दवाई का स्टॉक फिर से अस्पतालों को भेजा गया है। जिले में 41 चिकित्सकों के सापेक्ष 25 चिकित्सक कार्यरत हैं। पशुधन प्रसार अधिकारी के 150 में से 55 कार्यरत हैं। स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। - देवेंद्र सिंह बिष्ट, जिला पशु चिकित्साधिकारी, पौड़ी गढ़वाल।
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लंपी बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग को पर्याप्त दवाई की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बीमारी को गंभीरता से लिया जा रहा है।
-डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, जिलाधिकारी गढ़वाल।