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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप

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कोटद्वार तहसील में धरना देती आंगनबाड़ी कार्यकर्ता। - फोटो : KOTDWAR
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उन्हें राज्य कर्मचारी घोषित करने, मानदेय 18 हजार रुपये करने समेत सात सूत्री मांगों को लेकर फिर से कोटद्वार तहसील में डेरा जमा लिया है। तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन करते आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।
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शनिवार को दुगड्डा और रिखणीखाल ब्लॉक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहुंची, यहां उन्होंने अपनी सात सूत्री मांग को लेकर तहसील में धरना दिया। इस मौके पर हुई सभा में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार पर अनदेेखी का आरोप लगाया। कहा कि वर्तमान समय में सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर बहुत सी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। कार्यकर्ताओं के माध्यम से राष्ट्रीय पोषण अभियान, टीकाकरण अभियान, मातृत्व वंदना योजना, नंदा गौरा कन्या धन योजना, पिछड़ी जातियों की गणना, बीएलओ का कार्य, पल्स पोलियो अभियान, राशन कार्ड सर्वे, स्वजल योजना, जनगणना कार्य आदि स्मार्ट फोन के जरिए करवाए जा रहे हैं। कहा कि संगठन में कार्य करने वाली महिलाओं में अधिकांश विधवा और तलाकशुदा हैं। इसी के माध्यम से वे अपने परिवार और बच्चों का पालन पोषण करते हैं। अल्प मानदेय में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मौके पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी कार्यकर्ताओं और सेविकाओं को 18 हजार रुपये मानदेय देने या मजदूरी के दायरे में लाकर प्रतिदिन 500 रुपये के हिसाब से 15 हजार रुपये देने की मांग की। इस अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष बसंती रावत, ब्लाक अध्यक्ष सुनीता, अनीता बिष्ट, मुन्नी रावत, ऊषा देवी, सविता, ऊषा गोस्वामी, रोशनी, रिहाना, गीता भट्ट, रेखा भंडारी आदि मौजूद थे।
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