काश्तकारों को सुविधा देने के लिए दस साल पूर्व आधा दर्जन गांवों के लिए बनाए जाने वाला रोपवे खोंगचा-पंयाखोली का निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो पाया है। कार्यदायी संस्था गढ़वाल मंडल विकास निगम ने निर्माण के नाम पर तारों के सहारे जो ट्राली जोड़ी थी वह आज तक अपनी जगह से हिली नहीं। साथ ही एकत्रित (नगदी फसल) सामग्री को रखने के लिए टीन शेड (स्टोर)आदि का निर्माण भी नहीं किया है।
विकासखंड कीर्तिनगर के लोस्तु बडियारगढ़ क्षेत्र में काश्तकारों की नगदी फसल को बाजार तक पहुंचाने के लिए वर्ष 2006 में खोंगचा-पंयाखोली रोपवे का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। समविकास योजना के तहत लग-भग 20 लाख की लागत से बनाई जाने वाली इस योजना के निर्माण का जिम्मा गढ़वाल मंडल विकास निगम को दिया गया।
दस साल बीत जाने के बाद भी न तो योजना का निर्माण पूरा हो पाया और नहीं काश्तकारों को इसका लाभ मिल पाया है। पूर्व प्रधान राकेश बर्त्वाल व बल्ला देवी कहते हैं कि उनके क्षेत्र के खोंगचा, सरकासैण, डांडाखील, पाड़व, मोलधार, सरमोली, पल्लापटाल आदि कई गांवों में चौलाई, आलू, सोयाबीन, राजमा, बेमौसमी सब्जी व फल की खेती की जाती है।
मोटर मार्ग से दूर होने से काश्तकारों की यह फसल बाजार तक न पहुंच पाने से उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाते थे। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए क्षेत्रीय लोगों ने उक्त रोपवे की मांग की थी। योजना स्वीकृत हुई किंतु गढ़वाल मंडल विकास निगम ने निर्माण के नाम पर मात्र तारों के सहारे ट्राली लटका कर काम अधूरा छोड़ दिया।
रोपवे के दोनों छोरों पर सामग्री को रखने के लिए शेडों का निर्माण किया जाना था। काश्तकार कहते हैं कि अगर रोपवे बन जाता तो उससे उनको कई फायदे होते। वर्तमान में उक्त गांव मोटर मार्ग से जुड़ जाने के बाद भी आज इन गांवों के लिए रोपवे का महत्व कम नहीं हुआ है।
-योजना का अधूरा निर्माण करने पर निगम का भुगतान रोक दिया गया है। इसके लिए शासन स्तर पर बैठक आयोजित हो चुकी है आदेश आने पर निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा।
अमर सिंह, जिला उद्यान अधिकारी टिहरी।