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जंगलों में आग और प्राकृतिक स्रोतों के घटते जल स्तर पर जताई चिंता

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यमकेश्वर। गुरु शिक्षा पर्यावरण बाल एवं महिला उत्थान समिति भृगुखाल की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी में आग लगने से जंगलों को हो रहे नुकसान, पहाड़ों में प्राकृतिक स्रोतों के घटते जल स्तर और बढ़ते तापमान पर चिंता जताई गई। इस मौके पर महिलाओं ने अपने खेतों में दस-दस पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का संकल्प लिया।
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भृगुखाल में आयोजित विचार गोष्ठी में समिति के संस्थापक कपिल रतूड़ी ने कहा कि राज्य में अविकसित पर्यावरण संतुलन में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समिति अगले दो माह में यमकेश्वर क्षेत्र की अन्य कीर्तन मंडलियों के माध्यम से एक हजार महिला सदस्यों को जोड़कर क्षेत्र में एक लाख पौधों का रोपण करेगी एवं रोजगार भी उपलब्ध कराएगी। समिति प्रत्येक सदस्य को पौधों के संरक्षण के लिए अगले पांच वर्षों तक प्रोत्साहन राशि भी देगी और भविष्य में उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी इसका प्रसार करेगी। समिति के को-आर्डिनेटर अतुल दर्शन ने कीर्तन मंडली के सदस्यों को वनों के महत्व की जानकारी दी। समिति के सचिव सुनील कांत ने बढ़ते तापमान के लिए पेड़ों की अत्यधिक कटाई और शहरी रहन-सहन को जिम्मेदार ठहराया।
इस मौके पर समिति की कोषाध्यक्ष साधना रतूड़ी, कीर्तन मंडली थानूर की अध्यक्ष राजेश्वरी देवी, अनीता देवी, संतोषी देवी, पूनम देवी, ममता देवी, कमलेश्वरी देवी, सुमन लता देवी, गुड्डी देवी, पुष्पा देवी, सतेश्वरी देवी, कविता देवी, सुमति देवी, रेखा देवी, बसंती देवी, प्रतिमा देवी, सीता देवी, संगीता देवी, सीमा देवी, आकांक्षा देवी, शोभा देवी आलोक बिष्ट, सोहन सिंह आदि उपस्थित थे।
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