कोटद्वार। 25 सितंबर, 2016 को युकां नेता मनमोहन झिंकवाण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की फिर से जांच होगी। एसीजेएम कोर्ट ने कोतवाली पुलिस की ओर से लगाई गई फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है। कोर्ट ने कोटद्वार पुलिस को मामले की पुनर्विवेचना के आदेश दिए हैं। कोर्ट के आदेश मिलते ही मनमोहन झिंकवाण की संदिग्ध हालात में हुई मौत की फाइल फिर से खुल गई है।
वादी के अधिवक्ता कृष्ण गोपाल नेगी ने बताया कि करीब ढाई साल पहले युकां नेता मनमोहन झिंकवाण की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। मृतक के पिता रुद्रप्रयाग नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र सिंह झिंकवाण ने अपने बेटे की हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस में तहरीर दी थी। पुलिस ने इस मामले में संबंधित पक्षों से कोई पूछताछ नहीं की। अधिवक्ता कृष्ण गोपाल नेगी ने बताया कि मनमोहन कोटद्वार में ग्रास्टनगंज स्थित अपने पैतृक आवास में रहता था। घटना के दिन वह अपनी कार से यूपी के जिला बिजनौर स्थित बढ़ापुर के एक रिजॉर्ट में गया था, जहां उसकी तबियत बिगड़ने लगी तो रिजार्ट प्रबंधक ने एक वाहन चालक की व्यवस्था कर उसे 25 सितंबर की रात कोटद्वार भिजवाया। तब उसके साथ वाहन में कोटद्वार की एक युवती और वाहन चालक भी मौजूद थे। पुलिस की फाइनल रिपोर्ट से वादी पक्ष संतुष्ट नहीं रहा। बताया कि इस बीच मनमोहन झिंकवाण की मौत के बारे में एक अज्ञात पत्र पुलिस को मिला था, जिसमें कुछ लोगों पर संदेह जाहिर किया गया था। पत्र में युकां नेता की मौत का कारण जशोधरपुर स्थित एक विवादित जमीन भी बताई गई, जिसकी पुलिस ने ठीक ढंग सेे जांच नहीं की। वादी के अधिवक्ता ने युवती की काल डिटेल और अन्य कई महत्वपूर्ण तथ्यों की ओर ठीक ढंग से जांच न होने की ओर कोर्ट का ध्यान आकृष्ट कराया। कोतवाल मनोज रतूड़ी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मामले की पुन: विवेचना की जा रही है।
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