कोटद्वार। ये आकाशवाणी का नजीबाबाद केंद्र है। शाम के सात बजकर बत्तीस मिनट हुए हैं, प्रस्तुत है कार्यक्रम ‘ग्राम जगत’ आज से पहाड़ के पर्वतीय अंचल का प्रतिनिधित्व करने वाला यह कार्यक्रम लोगों को नहीं सुनाई देगा। यही नहीं, लोकगीतों के फरमाइश के कार्यक्रम गिरीगुंजन, शैल संगीत और उत्तरायण भी अब नजीबाबाद आकाशवाणी से नहीं सुनाई देंगे। इसकी वजह इस कार्यक्रम का नजीबाबाद से देहरादून केंद्र पर शिफ्ट होना है।
27 जनवरी, 1978 को जब आकाशवाणी नजीबाबाद से शाम साढ़े पांच बजे सबसे पहले गढ़वाली में कार्यक्रम ‘न्यार द्वार की’ प्रसारित हुआ तो पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी लोकभाषा, लोकगीत और लोक संस्कृति के अन्य पहलुओं को सुनने और समझने के लिए लोग बड़े उत्साहित और लालायित नजर आए। लोक कलाकार रामरतन काला का कहना है कि आकाशवाणी नजीबाबाद की स्थापना के पीछे उद्देश्य भी यही था। उनका कहना है कि मंगलवार से जब ग्राम जगत के साथ ही लोकगीतों के फरमाइश के कार्यक्रम गिरीगुंजन, शैल संगीत और उत्तरायण भी नजीबाबाद आकाशवाणी केंद्र से नहीं सुनाई देंगे, तब इस केंद्र से जुड़े लोगों को बड़ी निराशा होगी। उनका कहना है कि आकाशवाणी केंद्र की क्षमता 200 किलोवाट और एफएम मोड है। इसके कारण इसकी पहुंच गढ़वाल और कुमाऊं के गांव-गांव तक है, जबकि देहरादून में खुले आकाशवाणी केंद्र की क्षमता मात्र 10 किलोवाट है। यही कारण है कि जौनसार भाबर समेत गढ़वाल और कुमाऊं के लोग इन कार्यक्रमों को नजीबाबाद से ही प्रसारित करने की मांग कर रहे हैं।
नजीबाबाद केंद्र ने संजोकर रखी उत्तराखंड की विरासत
नजीबाबाद केंद्र की स्थापना से उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में रेडियो ने वह दौर देखा, जब शादी-बारात में भी रेडियो उपहार स्वरूप दिए जाने लगे। नब्बे के दशक के अंत तक इस केंद्र की बदौलत रेडियो की धूम रही। इन कार्यक्रमों को सुनने के लिए लेह-लद्दाख, सियाचीन ग्लेशियर, जम्मू और कश्मीर समेत पूरे हिमालयी राज्यों में कार्यरत सैनिकों और प्रवासी बंधुओं की चिट्ठी आया करती थी। इस केंद्र ने उत्तराखंड की बड़ी विरासत को संजोए रखा। गढ़वाली लोकगायक विजय सैलानी, नरेंद्र सिंह नेगी, अनिल बिष्ट, संतोष खेतवाल और पदमश्री बसंती बिष्ट तथा कुमाऊंनी लोकगायक गोपाल बाबू गोस्वामी, हीरा सिंह राणा, कबूतरी देवी, बिशन सिंह बोहरा तथा रतन सिंह जौनसारी, राहुल वर्मा सहित सैकड़ों अन्य कलाकार इसी केंद्र की उपज हैं। भैरव दत्त धूलिया, ललिता प्रसाद नैथानी, राधाकृष्ण वैष्णव, बाबू सिंह चौहान (बिजनौर) नरेंद्र उनियाल, पीतांबर दत्त देवरानी, कर्नल बुद्धि सिंह रावत, पितृशरण रतूड़ी, डा. शेखर पाठक, राजीव लोचन शाह, योगेश पांथरी, डा. नंदकिशोर ढौंडियाल, डा. प्रेमलाल भट्ट समेत दर्जनों साहित्यकारों एवं कहानीकारों ने ग्राम जगत को अपने सृजन को एक नई ऊंचाई प्रदान की।
आकाशवाणी देहरादून के प्रारंभ होने की तिथि से आकाशवाणी नजीबाबाद का कार्यक्रम जोन परिवर्तित हो गया है। 29 जून से ग्राम जगत समेत ये कार्यक्रम आकाशवाणी देहरादून से प्रसारित किए जा रहे हैं।
-राजेश कुमार, केंद्राध्यक्ष आकाशवाणी नजीबाबाद।