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बैंकों के विलय को लेकर भड़के बैंक अधिकारी-कर्मचारी

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कोटद्वार। बैंकों के विलय के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत कोटद्वार के करीब सभी बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बैंकों को बंद कर कार्य बहिष्कार किया। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी के साथ प्रदर्शन करते हुए बैंकों के विलय पर अविलंब रोक लगाने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर आगे भी आंदोलन करने की चेतावनी दी।
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बुधवार को यूनियन के नगर संयोजक डीपीएस बिष्ट के नेतृत्व में बैंक अधिकारी और कर्मचारी बदरीनाथ मार्ग स्थित पंजाब नेेशनल बैंक शाखा के सामने एकत्र हुए। उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के आपस में विलय के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। इस अवसर पर उत्तरांचल बैंक इंपलाइज यूनियन के जिला सचिव वीरेंद्र सिंह रावत ने केंद्र सरकार पर कर्मचारी विरोधी नीतियों को अपनाने का आरोप लगाया। कहा कि केंद्र सरकार बैंकों को घाटे में बताकर विलय करने की बात कर रही है, जबकि कर्जा चुकाने के लिए ठोस कानून नहीं बनाया जा रहा है। ऋण नहीं चुकाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होने पर बैंकों को किसी प्रकार का घाटा नहीं सहना पड़ेगा, लेकिन, केंद्र सरकार बैंकों के विलय को लेकर अड़ियल रवैया अपनाए हुए है। विलय होने से बैंकों की संख्या कम होगी, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने बैंकों का विलय नहीं किया जाने, जानबूझ कर बैंकों का ऋण नहीं चुकाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानून बनाने और बैंक कर्मियों के कार्य को देखते हुए सम्मानजनक वेतन वृद्धि किए जाने की मांग की।
इस अवसर पर यूनियन के नगर संयोजक डीपीएस बिष्ट, रमेश नेगी, हरजीत सिंह, सुनील रावत, बीएस तोमर, तपस्या रोहित कुमार, रिक्की, नीरभ कुमार, देवेश रावत, विजय खंडूड़ी, राकेेश कुमार, सिद्धार्थ गोस्वामी, पंकज नेगी, सरस्वती देवी, अरविंद नेगी, एनएस भंडारी आदि मौजूद थे।
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