कोटद्वार। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत जीआईसी कोटद्वार में चल रहे आठ विकासखंडों के दस दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला के चौथे दिन एनसीईआरटी द्वारा विकसित सीखने के प्रतिफलों के बारे में चर्चा की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों से अपेक्षा की गई कि वे शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों से अपडेट रहे।
कार्यशाला में मुख्य संदर्भदाता डा अतुल बमराड़ा ने कहा कि प्रत्येक अध्यापक को सीखने के प्रतिफलों की विस्तृत जानकारी होना शिक्षण प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। एनसीईआरटी व देश-विदेश के शिक्षाविदें द्वारा गहन अध्ययन के पश्चात भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप कुछ बिंदु सुझाए गए हैं, जिसे बच्चे द्वारा उसके स्तर के परिपक्ष्य में पूरा किया जाना है। कहा कि सत्र के प्रारंभ में शिक्षा विभाग द्वारा एक नवाचारी कार्यक्रम मिशन कोशिश चलाया गया था, जिसका उद्देश्य पिछली कक्षा के लिए निर्धारित सीखने के प्रतिफलों को प्राप्त करना था। इस दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य भी शिक्षकों को एनसीईआरटी पुस्तकों की अवधारणा व शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों से अवगत करवाना है।
कार्यशाला एससीईआरटी उत्तराखंड के मार्गदर्शन में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पौड़ी द्वारा समस्त पौड़ी जिले के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक शिक्षकों को दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में जिले के आठ विकासखंडों रिखणीखाल, द्वारीखाल, दुगड्डा, यमकेश्वर, बीरोंखाल, नैनीडांडा, पोखड़ा और जयहरीखाल के 50 प्रतिभागी शामिल हैं। कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक सुभाष भारती, गोपाल सिंह, जागृति कुकरेती, उमेश लिंगवाल, रवीन्द्र बड़थ्वाल, भारतेंदु लखेड़ा, निधि नेगी, सुमन नौटियाल व अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के गणेश बलूनी उपस्थित रहे।