कोटद्वार/यमकेश्वर। पौड़ी जिले की तहसीलों में राजस्व कर्मियों और अधिकारियों का इस कदर टोटा पड़ गया है कि तहसीलदार के सेवानिवृत्त होने पर उनका चार्ज नायब तहसीलदार नहीं, बल्कि कानूनगो के पास आ जाता है। जिले की सबसे बड़ी और संवेदनशील कोटद्वार तहसील में नायब तहसीलदार के दोनों पद कई महीनों से खाली चल रहे हैं। अब तहसीलदार सीएस रावत की सेवानिवृत्ति के बाद यह पद भी खाली हो गया है। कमोवेश यही हाल यमकेश्वर तहसील का भी है। यहां राजस्व कर्मियों और अधिकारियों के पद रिक्त होने लोगों के काम नहीं हो रहे हैं।
31 मई को कोटद्वार के तहसीलदार सीएस रावत और यमकेश्वर के तहसीलदार राजेंद्र प्रसाद जखमोला अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए। यमकेश्वर तहसील में एसडीएम का पद शासन की ओर से ही सृजित नहीं है। वर्ष 2006 में अस्तित्व में आई यमकेश्वर तहसील में कभी भी राजस्व अधिकारी और कर्मचारी पूरे नहीं रहे। विधानसभा चुनावों के समय को छोड़कर बाकी समय यहां का अतिरिक्त चार्ज कोटद्वार और लैंसडौन के एसडीएम के पास रहता है। हाल यह है कि यमकेश्वर में नायब तहसीलदार तक स्थायी नहीं हैं। इसके चलते तहसीलदार का कार्यभार राजस्व निरीक्षक डबल सिंह रावत के पास आ गया है। कोटद्वार तहसील में भी नायब तहसीलदार के दोनों पद कई महीने से रिक्त चल रहे हैं। इसका असर भूमि संबंधी मामलों पर पड़ रहा है। दाखिल खारिज से लेकर अन्य कार्यों के लिए लोगों को तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
शुक्रवार से यहां तहसीलदार और नायब तहसीलदार का चार्ज कानूनगो कैलाश बिडालिया के पास आ गया है। एसडीएम राकेश तिवारी का कहना है कि श्रीनगर के तहसीलदार सुनील कुमार को यहां स्थानांतरित करने के आदेश जिलाधिकारी ने दिए हैं। वह जल्द ही कार्यभार ग्रहण कर लेंगे। 12 तहसील और एक उपतहसील वाले पौड़ी जिले में मात्र एक तहसीलदार सुनील कुमार श्रीनगर में तैनात हैं। राजस्व कर्मियों का भी बड़े पैमाने पर टोटा है। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। एसडीएम विहीन धुमाकोट और सतपुली तहसीलों को कई महीनों से नायब तहसीलदार चला रहे हैं।