कोटद्वार। दुगड्डा विकासखंड के घाड़ क्षेत्र के ग्रामीणों ने चरेख से धरगांव तोक सिमलखेतू तक बनी पांच किमी सड़क का मुआवजा न मिलने पर आक्रोश व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि आठ साल पूर्व बनी इस सड़क का अब तक डामरीकरण नहीं हो सका है। इससे लोग कच्ची सड़क पर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। क्षेत्रवासी इस मार्ग को धरगांव से गहड़ तक जोड़ने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
ग्राम पंचायत चर धरगांव की प्रधान रेशमा बेगम, कूरीखाल गांव निवासी वीरेंद्र सिंह राणा, महबूब अली, महिपत सिंह, गबर सिंह, जगमोहन सिंह, कासंबरी देवी का कहना है कि वर्ष 2009 में क्षेत्र के कई गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने के लिए चरेख से धरगांव तोक सिमलखेतू तक पांच किमी सड़क बनाई गई, जिसका डामरीकरण तो दूर, मुआवजा तक ग्रामीणों को उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस सड़क के निर्माण में कूरीखाल, सिमलखेतू, कफल्डी और पाली गांवों की भूमि का कटान और दबान हुआ है। ग्रामीण लंबे समय से मुआवजे के भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों ने चरेख-धरगांव सड़क के डामरीकरण की मांग मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर की। कहा कि सुदूरवर्ती क्षेत्र होने के कारण राजनेता केवल चुनाव के वक्त क्षेत्र में आते हैं। समुचित यातायात सुविधा न होने के कारण अधिकारी गांवों की समस्या का संज्ञान ही नहीं लेते। पूर्व में बनी पांच किमी सड़क पर ग्रामीणों को हिचकोले खाकर यात्रा करनी पड़ रही है।
उधर, चर धरगांव की प्रधान रेशमा परवीन ने धरगांव-गहड़ पांच किमी सड़क का जल्द निर्माण करने की मांग मुख्यमंत्री से की है। कहा कि लोनिवि दुगड्डा इस मार्ग पर सर्वे तक ही सिमट गया है। इससे क्षेत्र के लोगों को पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है।
कोट
चरेख-धरगांव सड़क के लंबित मुआवजे के बारे में विभाग से जानकारी ली जाएगी। इस सड़क के डामरीकरण का कोई प्रस्ताव जनप्रतिनिधियों की ओर से प्राप्त नहीं हुआ है। धरगांव-गहड़ मार्ग निर्माण के संरेखण का प्रस्ताव बनाकर शासन में भेजा गया है। -निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।