कोटद्वार। कोटद्वार भाबर के 73 गांवों को नगर पालिका में मिलाने और इसके बाद नगर निगम बनाए जाने के विरोध में यूकेडी ने दुर्गापुर में महापंचायत का आयोजन किया। इस दौरान वक्ताओं ने राज्य सरकार पर जनविरोधी निर्णय लेने का आरोप लगाया। कहा कि जनता के मुद्दों को छोड़ दिया गया है और सरकार गांवों को खत्म कर नगर निगम बनाने के एकसूत्री कार्यक्रम पर चल रही है। कोटद्वार की जनता चुप नहीं बैठेगी। लोकतांत्रित तरीके से विरोध की सुनवाई नहीं होगी तो कोर्ट की शरण में जाने का विकल्प भी खुला है।
दुर्गापुर चौक पर हुई महापंचायत और जनसभा में यूकेडी के मिशन को सफल बनाने के लिए 52 महिलाओं और पुरुषों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। यूकेडी के केंद्रीय संरक्षक डा. शक्तिशैल कपरवाण ने कहा कि भाजपा सरकार ने बिना जनसुनवाई के कोटद्वार में नगर निगम बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह गांवों के विकास की विरोधी है, गांवों की पहचान मिटाने के लिए नगर निगम का निर्माण किया जा रहा है। दुगड्डा ग्राम प्रधान संगठन की ओर से पदमपुर सुखरो के प्रधान चंद्रप्रकाश नैथानी ने कहा कि नगर निगम भाबर के लोगों की सहूलियत के लिए नहीं बल्कि भविष्य में मिलने वाले टैक्स की कमाई के लिए बनाया जा रहा है। भाबर के गांवों को नगर निगम में शामिल कर कोटद्वार की गंदगी व कचरे को भाबर क्षेत्र में डाला जाएगा।
उत्तराखंड आंदोलनकारी जनमोर्चा के जिला अध्यक्ष प्रवेंद्र रावत ने कहा कि सरकार की योजना भाबर क्षेत्र का विकास करने की नहीं, बल्कि टैक्स थोपकर उनसे कमाई करने की है। कोटद्वार शहर की हालत किसी से छिपी नहीं है। वरिष्ठ नेता नंदन सिंह रावत ने नगर निगम के विरोध में चल रहे आंदोलन को व्यापक समर्थन देने की अपील की। महापंचायत को बीना जोशी, असीमा रावत, यूकेडी जिला अध्यक्ष जगदीपक सिंह रावत, रमेश कोठारी, हरीश द्विवेदी, सुनील सेमवाल, मनोहर सिंह नेगी, श्रवण सिंह रावत, आशीष गौनियाल, मुकेश ध्यानी, विनोद सुंदरियाल, भगवती प्रसाद कंडवाल, बालम सिंह नेगी, इंदु देवी, सुधा गौड़, शांति रावत, आशा देवी, सर्वेंद्र काला, ममता रावत, शेखरी रावत, शरला नेगी, रवींद्र केष्टवाल आदि ने संबोधित किया।