कोटद्वार/भाबर। भारी बारिश की चेतावनी से एक बार फिर कोटद्वार और भाबर के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं। आने वाले दिनों में यदि तीन और चार अगस्त जैसी बारिश हुई तो क्षेत्र में भारी तबाही मच सकती है। सरकारी मशीनरी ने 23 दिन पहले आई तबाही से तबाह हुई सार्वजनिक संपत्तियों की अभी तक सुध नहीं ली है। कोटद्वार-भाबर मार्ग पर बना तेलीस्रोत रपटा बुरी तरह क्षतिग्रस्त है, जिस पर उसी हालत में वाहनों का संचालन हो रहा है। तेलीसोत गदेरे पर रामदयालपुर और तेलीबाड़ा के बीच बनी लोनिवि की संकरी पुलिया भी तबाही का कारण बन रही है जिसकी चौड़ाई बढ़ाने की जरूरत है।
तीन और चार अगस्त की आपदा से सबसे ज्यादा तबाही पनियाली, ग्वालगढ़ और तेलीस्रोत गदेरे ने मचाई। सरकारी मशीनरी ने शहर के नजदीकी इलाकों में तो राहत और बचाव कार्य कराया, लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों की अभी तक सुध नहीं ली गई। सत्तीचौड़ निवासी चंद्रशेखर दुतपुड़ी, शोभा देवी और प्रताप सिंह का कहना है कि ग्वालगढ़ गदेरे को चैनलाइज करने के नाम पर महज खानापूर्ति की गई है। भारी बारिश हुई तो पूरे गांव को एक बार फिर से बाढ़ का खतरा बना है।
रामदयालपुर निवासी नंदन सिंह मेहरा, उमेद सिंह, बीरेंद्र प्रसाद केष्टवाल का कहना है कि तेलीबाड़ा के पास तेलीस्रोत गदेरे पर बनी पुलिया के संकरी होने के कारण गदेरे का प्रवाह गांव की आबादी की ओर मुड़ गया। पुलिया को यदि चौड़ा नहीं किया गया तो तेलीबाड़ा और रामदयालपुर दोनों गांवों में फिर से बाढ़ का खतरा मंडराता रहेगा।
विमल प्रसाद शुक्ला, नत्थी प्रसाद केष्टवाल, चंद्रकांता, दीपक कुमार और सुदेश शर्मा का कहना है कि तीन और चार अगस्त की रात की बाढ़ से क्षतिग्रस्त तेलीस्रोत रपटे की अब तक मरम्मत नहीं हुई है। लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। सिंचाई विभाग की नींद भी बाढ़ आने के बाद खुली है। सुरक्षा दीवारों के लिए की गई खुदाई का मलबे ने बाढ़ में और अधिक नुकसान पहुंचाया है।
कोट
तेलीस्रोत रपटे का निर्माण जल्द कराया जाएगा। यहां पर पुल निर्माण की प्रथम चरण की स्वीकृति मिली है। संकरी पुलिया को चौड़ा करने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।-निर्भय सिंह, ईई लोनिवि दुगड्डा।