कोटद्वार। नगर निगम बनने के बाद से गौरी पुस्तकालय और वाचनालय बदहाल है। स्थिति यह है कि पुस्तकालय के भवन में नगर निगम बोर्ड का मीटिंग हाल बना दिया गया है, जबकि पुस्तकें और रैक एक छोटे से कमरे में शिफ्ट कर दिए गए हैं, जिससे पुस्तक पढ़ने के शौकीन लोगों को अब पुस्तकालय की किताबें पढ़ने को नहीं मिल पा रही हैं।
अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अक्टूबर 1980 में हिमालयन हास्पिटल ट्रस्ट के संस्थापक स्वामीराम की माता के नाम पर नगर पालिका में बनाए गए गौरी सार्वजनिक पुस्तकालय एवं वाचनालय का लोकार्पण किया। शुरुआती दिनों में स्थानीय लोगों ने इसका लाभ उठाया, लेकिन अब पालिका पुस्तकालय के प्रति निष्क्रिय हो गई। इसके बाद गौरी पुस्तकालय, राजा राममोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान कोलकाता के रहमोकरम पर संचालित होता रहा। वर्ष 2010 तक राजा राम मोहन राय पुस्तकालय ही गौरी पुस्तकालय के संचालन को बजट मुहैया कराता था, लेकिन बाद में बजट के बजाय पुस्तकें भेजी जाने लगीं। उत्तर प्रदेश भाषा निधि शिक्षा विभाग संस्थान ने भी गौरी पुस्तकालय को पूर्व तक दी जाने वाली किताबें देनी बंद कर दीं। बाद में पालिका बोर्ड फंड से ही पुस्तकालय में रखी पुस्तकों की मरम्मत की जाने लगी, जो नाकाफी साबित हुई। पुस्तकालय में हिंदी की करीब दस हजार और अंग्रेजी की करीब ढाई हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं। गढ़वाली, उर्दू व संस्कृत की किताबें भी पुस्तकालय में हैं। नवंबर 2017 में डा. स्वामीराम हिमालयन हास्पिटल ट्रस्ट ने पुस्तकालय की दशा सुधारने का बीड़ा उठाया। इसके तहत ट्रस्ट की ओर से करीब 25 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई। इस धनराशि से प्रथम चरण में पुस्तकालय भवन की दशा सुधारी गई और इसके बाद पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी बनाने के लिए यहां कंप्यूटर व इंटरनेट की व्यवस्था की गई। नगर निगम बनने के बाद नगर निगम प्रशासन ने लाइब्रेरी को नगर निगम बोर्ड का मीटिंग हाल बना दिया, जिससे लाइब्रेरी एक बार फिर बदहाल स्थिति में पहुंच गई। अनूप कुमार, विवेक कुमार व राकेश सिंह आदि का कहना है कि नगर निगम प्रशासन को पुस्तक प्रेमियों की भावनाओं को देखते हुए लाइब्रेरी को पुन: स्थापित करना चाहिए।
स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. विजय धस्माना ने कहा कि साहित्य प्रेमियों और पुस्तक पढ़ने का शौक रखने वाले सभी वर्गों के लिए इस लाइब्रेरी में पुस्तकों का संग्रह किया गया था। लाइब्रेरी का प्रयोग अन्य कार्योें के लिए होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सहायक नगर आयुक्त राजेश नैथानी ने कहा कि नगर निगम बोर्ड के मीटिंग हाल के लिए प्रस्ताव बना दिया गया है। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव बनाकर जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। मीटिंग हाल बनने के बाद लाइब्रेरी को पुन: स्थापित किया जाएगा।
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