कोटद्वार। महर्षि कण्व की तपस्थली और देश को नाम देने वाले हस्तिनापुर के चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम को आखिरकार राष्ट्रीयस्तर पर पहचान मिल ही गई है। केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन की प्रमुख परियोजना स्वच्छ आइकॉनिक स्थल के तीसरे चरण में कण्वाश्रम का नाम भी शामिल किया है।
केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2016 में पहले देशभर से दस चुनिंदा दर्शनीय स्थलों को स्वच्छ आइकॉनिक स्थल (एसआईपी) में शामिल किया गया। नवंबर 2017 में दूसरे चरण की सूची जारी की ओर गत 12 जून को एसआईपी के तीसरे चरण के तहत दस नए महत्वपूर्ण दर्शनीय आइकॉनिक स्थलों में उत्तराखंड के अंतिम गांव माणा के साथ ही कण्वाश्रम को भी सूची में शामिल किया है। कण्वाश्रम विकास समिति के अध्यक्ष ले. कमांडर बीएस रावत (रिटा.) ने कण्वाश्रम को देश के चुनिंदा 30 स्वच्छ आइकॉनिक स्थलों में शामिल करने के लिए राज्य सरकार और केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा का आभार जताया। उन्होंने बताया कि तीसरे चरण की सूची में राघवेंद्र स्वामी मंदिर, आंध्र प्रदेश, हजारद्वारी पैलेस पश्चिम बंगाल, ब्रह्मा सरोवर मंदिर कुरुक्षेत्र, हरियाणा, यूपी के बिजनौर जिले में स्थित विदुरकुटी, पैंगांग झील लद्दाख, नागवासुकी मंदिर इलाहाबाद, इमा कैथल मार्केट इम्फाल, मणिपुर, सबरीमाला मंदिर, केरल शामिल हैं।