कोटद्वार। स्वास्थ्य विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल में सेवाएं देने वाली विभिन्न संस्थाओं का करीब 75 लाख रुपये बकाया चल रहा है, लेकिन स्वास्थ्य महकमा इसको लेकर लापरवाह बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती के चलते दवाई की कंपनियों, सफाई और भोजन आदि की सेवाएं देने वाली संस्थाओं का अस्पताल से मोह भंग होता जा रहा है। लाखों की उधारी में चल रहे अस्पताल में महंगी दवाइयां आनी बंद हो गई हैं। सफाई और भोजन व्यवस्था भी किसी प्रकार चल रही है। शीघ्र विभाग द्वारा उधारी नहीं चुकाई गई तो अस्पताल का ठप होना निश्चित है। इसका खामियाजा अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को भुगतना पड़ेगा।
पौड़ी जिले की 80 प्रतिशत आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले कोटद्वार के सरकारी अस्पताल मेें स्वास्थ्य विभाग सुविधाएं को बढ़ा रहा है, लेकिन उस हिसाब से अस्पताल के लिए बजट की व्यवस्था नहीं कर रहा है। आलम यह है पंद्रह वर्ष पहले जो बजट निर्धारित हुआ था, आज भी वही दिया जा रहा है। तब से अब तक अस्पताल का करीब चार गुना विस्तार हो चुका है। तब जनरेटर से लेकर भवन और मशीनें नहीं थीं, लेकिन वर्तमान में अस्पताल के दो बहुमंजिले भवन, डिजिटल एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, एमआरआई, लिथोट्रिप्सी जैस अत्याधुनिक मशीनें संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही करीब 140 बेड की व्यवस्था चल रही है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि समय पर बजट नहीं आने के कारण पिछले मार्च से अभी तक दस दवाई कंपनियों का करीब 50 लाख रुपया, सफाई एजेंसी का 14 लाख और भोजन व्यवस्था की एजेंसी का करीब 12 लाख का बकाया चल रहा है। इसके अलावा अस्पताल के जनरेटर और बिजली आदि के लिए भी लाखों रुपयों की आवश्यकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
यह बात सही है कि पिछले कई वर्षों से अस्पताल का बजट नहीं बढ़ा है, जबकि अस्पताल का लगातार विकास हो रहा है। बजट की कमी के कारण अस्पताल की व्यवस्थाओं को संचालित करने में परेशानियां आ रही है। कुछ बकाया इसी बजट में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। बाकी बजट के लिए शासन को लिखा जाएगा।
- डा. आईएस सामंत, सीएमएस राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार
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