कालागढ़/कोटद्वार। रामगंगा बांध परियोजना की कालोनियों में निवास कर रहे 566 लोगों को अवैध मानते हुए एनजीटी ने तीन मार्च तक उन्हें हटाने के आदेश पौड़ी जिला प्रशासन को दिए हैं। एनजीटी के आदेश से कालोनी वासियों में हड़कंप मचा है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रिंसिपल बेंच में गत 23 जनवरी को टीएन गोदावर्मन थिरूमलपाद वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया एंड अदर्स मामले की सुनवाई हुई। जिला प्रशासन पौड़ी की ओर से उपस्थित हुए एडीएम रामजीशरन शर्मा ने अपने बयान में बताया कि लगभग 964 अवैध कब्जे कालागढ़ कार्बेट टाइगर रिजर्व में हैं। एनजीटी की चेयरपर्सन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि 398 कब्जेदारों ने शपथपत्र देकर पुनर्वास की मांग की है। उनकी जांच हो रही है। बाकी 566 अवैध कब्जेदार हैं, जिन्होंने शपथपत्र नहीं भरा है। उन्हें हटाने की कार्रवाई जिला प्रशासन को करनी है। चेयरपर्सन बेंच ने आदेश दिया कि 566 परिवारों को तीन मार्च तक वहां से हटा दिया जाए। न्यायाधीश चेयरपर्सन स्वतंत्र कुमार और एक्सपर्ट सदस्य विक्रम सिंह सजवाण ने इस आशय के आदेश जारी किए हैं। एनजीटी के इस आदेश की जानकारी लगते ही कालोनी वासियों में हड़कंप मचा है।
कार्बेट की जमीन वापस कराने की चल रही कवायद
कालागढ़/कोटद्वार। वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की शिकायत पर दिसंबर 2013 में एनजीटी ने कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कालागढ़ में हो रहे अतिक्रमण का संज्ञान लेते हुए इस जमीन को वन विभाग को लौटाने के आदेश उत्तराखंड सरकार को दिए थे। पौड़ी जिला प्रशासन की ओर से कालागढ़ रामगंगा परियोजना की कालोनियों में रह रहे नागरिकों की सूची बनाकर एनजीटी को सौंपी गई थी। राज्य सरकार ने उन्हें अन्यत्र पुनर्वासित करने की याचिका प्रस्तुत की थी।
पुनर्वास की सूची सार्वजनिक करने की मांग
कालागढ़। स्थानीय जनता ने जिला प्रशासन से पुनर्वास के लिए बनाई गई सूची को सार्वजनिक करने की मांग की है। नागरिक नदीम अहमद, तारिक, रईस अहमद, संजय का कहना है कि प्रशासन 964 नागरिकों को अवैध मानकर कार्रवाई करता रहा है। एनजीटी के आदेश में पुनर्वास के लिए केवल 398 कब्जेदार ही बताए गए हैं, जबकि यहां बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद हैं।