कोटद्वार। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गत वर्ष 3/4 अगस्त को कोटद्वार और ग्रामीण अंचल में आई बाढ़ के प्रभावितों को नियमानुसार 12 सप्ताह के भीतर मुआवजे की राशि का भुगतान करने के आदेेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यह आदेश गत वर्ष की आपदा के बाद राहत देने में बरती गई लापरवाही को आधार बनाते हुए दाखिल की गई जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिया है।
अधिवक्ता अमृतांशु बड़थ्वाल और रोहित डंडरियाल ने बताया कि आपदा पर उनकी ओर से हाईकोर्ट में 23 अगस्त 2017 को जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य सरकार समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। करीब एक साल तक मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नियमानुसार मुआवजा राशि देने के आदेश दिए हैं। अधिवक्ता अमृतांशु बड़थ्वाल और रोहित डंडरियाल ने बताया कि गत वर्ष तीन और चार अगस्त को कोटद्वार में भारी बारिश से आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई थी। बाढ़ के बाद स्थानीय प्रशासन एवं राज्य सरकार द्वारा बाढ़ पीड़ितों की तात्कालिक एवं दीर्घकालिक सहायता उपलब्ध कराने में उदासीनता बरती गई, जिसके कारण उन्हें प्रभावित काश्तकारों और किसानों के हित में जनहित याचिका दाखिल करनी पड़ी। बताया कि कोर्ट का निर्णय प्रभावितों के पक्ष में आया है। ऐसे आपदा प्रभावित जिन्हें अभी तक क्षतिपूर्ति धनराशि नहीं मिली है, वे हाईकोर्ट के 23 अक्तूबर 2018 के निर्णय पर राज्य सरकार के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।