कोटद्वार। नगर निगम विरोध संघर्ष समिति ने कोटद्वार भाबर की 73 ग्राम पंचायतों को शामिल कर नगर निगम बनाने की अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की है। कहा कि भाबर के ग्रामीण प्रारंभ से ही नगर पालिका के विस्तार और नगर निगम के गठन का विरोध कर रहे हैं। कहा कि सीमा विस्तार और नगर निगम का गठन जनता की भावनाओं के विपरीत है। कहा कि चारों ओर से आरक्षित वन क्षेत्र और नेशनल पार्क के बफर जोन से घिरे भाबर के ग्रामीण ग्राम पंचायती व्यवस्था से संचालित हो रहे हैं। नगर निगम बनाने की मांग कभी जनता की ओर से नहीं आई।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नगर निगम विरोध संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण रविवार को कोटद्वार तहसील में एकत्र हुए। यहां उन्होंने नगर निगम के विरोध में आपत्तियां दर्ज करवाई और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कहा कि कोटद्वार तहसील प्रशासन और पौड़ी जिला प्रशासन ने जनभावनाओं के विपरीत 73 गांवों के नगर पालिका में सीमा विस्तार कर नगर निगम की अधिसूचना जारी की है। कहा कि जब सरकार , शासन और प्रशासन से उन्हें न्याय की कोई उम्मीद नहीं हुई तो उन्हें हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ा। चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका के सीमा विस्तार और नगर निगम की अधिसूचना वापस नहीं ली तो भाजपा को यूपी के गोरखपुर और फूलपुर जैैसे परिणाम आगामी लोकसभा चुनाव में दिए जाएंगे। भाबर की जनता राजनीति से ऊपर उठकर नगर निगम का विरोध कर रही है।
धरना-प्रदर्शन में अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण, प्रवेंद्र सिंह रावत, चंद्रप्रकाश नैथानी, आनंद बल्लभ घिल्डियाल, डा. चंद्रमोहन खरक्वाल, जगदीपक सिंह रावत, विजय ध्यानी, हरीश घिल्डियाल, भगवती प्रसाद कंडवाल, विजयपाल मेहरा, सुरेश रावत, प्रदीप नेगी, महेंद्र सिंह, हरीश जखमोला, विजय नवानी, प्रवेश नवानी, गजेंद्र तिवारी, मनोज डबराल, कीरत सिंह नेगी, श्रवण सिंह रावत, गोपाल सिंह गुसाईं, महिपाल मेहरा, बीरेंद्र थलेड़ी, पुष्कर रावत, बालम नेगी, महेंद्र रावत, शिशुपाल नेेगी, दर्शन नेगी, विजय कंडारी आदि मौजूद थे।
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