कोटद्वार। जंगल में मानवीय भूल और अन्य कारणों से गर्मियों में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए लैंसडौन वन प्रभाग मुस्तैद हो गया है। वनाग्नि से निपटने के लिए विभाग ने अपने पांचों रेंजों में 26 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। 15 मार्च से लेकर 15 जून तक फायर सीजन रहता है। इस दौरान आग लगने से वन संपदा को भारी मात्रा में नुकसान होता है। वन अधिकारियों की मानें तो इस बार आग पर काबू पाने के लिए सभी क्रू स्टेशनों को आग बुझाने के औजारों और वायरलैस सेट की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक क्रू स्टेशन में सेक्सन आफिसर, बीट अधिकारी के साथ पांच से सात वन कर्मियों की तैनाती की गई है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते जंगल को आग से बचाना विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है।
43327.60 हेक्टेयर वन भूमि में फैले लैंसडौन वन प्रभाग में कर्मचारियों की भारी कमी के चलते आग से वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा में वन कर्मियों को पसीना बहाना पड़ सकता है। यहां 188 पदों में से 110 पर ही कर्मचारी तैनात हैं। बाकी के पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में एक फॉरेस्टर के पास चार बीटों का अतिरिक्त भार दिया गया है। वन प्रभाग के पास जंगल में आग बुझाने वाले यंत्रों का भी टोटा बना हुआ है। वन कर्मियों के पास आग से सुरक्षा के लिए हेलमेट, दस्ताने और जूते नहीं हैं। ऐसे में वन कर्मी जान जोखिम में डालकर आग को बुझाने का काम करते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
वन प्रभाग ने आग को फैलने से बचाने के लिए विभिन्न क्रू स्टेशनों में सुविधाओं के साथ वन कर्मियों की तैनाती की गई है। सड़क पर छह मीटर और पैदल मार्गों पर तीन मीटर फायर लाइन बनाई गई है, जिन्हें जलाने का काम शुरू किया गया है।
-गिरीश चंद्र बेलवाल, एसडीओ लैंसडौन वन प्रभाग