कोटद्वार। मॉडल रेलवे स्टेशन कोटद्वार का मात्र नाम ही मॉडल है। यहां मॉडल जैसा कुछ भी नहीं है। रेलवे स्टेशन की बदहाली का अलम यह है कि परिसर में वाटर कूलर तो लगा है, लेकिन उसमें पानी नहीं है। स्टेशन पर यात्रियों के लिए कैंटीन तक की सुविधा मौजूद नहीं है। मालगोदाम भी जर्जर हालत में पहुंच गया है। इसमें असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।
कोटद्वार के रेलवे स्टेशन पर सुबह से शाम तक सीमित ट्रेनें ही आती हैं। गढ़वाल का एकमात्र रेलवे स्टेशन होने के कारण यहां दूर-दराज क्षेत्र से यात्री पहुंचते हैं। यात्रियों को अन्य सुविधाएं तो दूर, पीने तक के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पाता है। रेलवे स्टेशन पर लगाया गया वाटर कूलर भी कई महीनों से खराब पड़ा है, जिसकी कोई सुध नहीं ले रहा है। इसके अलावा रेलवे प्लेटफार्म पर यात्रियों के खाने पीने के लिए कोई कैंटीन सुविधा भी नहीं है। रेलवे स्टेशन के मालगोदाम को भी असामाजिक तत्वों ने शौचालय बना दिया है। शाम ढलते ही यह मालगोदाम नशेड़ियों और जुआरियों का अड्डा बन जाता है।
उधर, स्टेशन मास्टर रामाश्रय राम ने बताया कि कोटद्वार रेलवे स्टेशन से होकर लकड़ीपड़ाव और आम पड़ाव के लोगों की आवाजाही होती है। स्टेशन पर आरपीएफ के जवानों की कमी के कारण असामाजिक अंधरे का आश्रय लेते हुए यहां नशा करते हैं और सफाई व्यवस्था बिगाड़ देते हैं। वाटर कूलर की शीघ्र मरम्मत कराई जाएगी।
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