कोटद्वार। दुगड्डा। जीआईसी कोटद्वार में डीएलएड कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें प्रशिक्षणार्थियों को डीएलएड की वैधानिकता और शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की जानकारी दी गई।
जीआईसी में आयोजित डीएलएड की कार्यशाला में 17 विद्यालयों के 90 अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। जिसमें चंद्रमोहन असवाल ने डीएलएड की वैधानिकता के बारे बताते हुए कहा कि शिक्षक को बदलते आयामों के साथ शिक्षा देनी चाहिए। कहा बदलती चुनातियों में नए गुणों के विकास में शिक्षक की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है। शिक्षक संतोष नेगी ने बताया कि कार्यशाला के लिए नई तिथि 26 जनवरी निर्धारित की गई ।
उधर, जीआईसी दुगड्डा में डीएलएड की राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान देहरादून के क्षेत्रीय निदेशक प्रदीप रावत ने डीएलएड कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने डीएलएड प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण की महत्ता की विस्तृत जानकारी दी।
जनपद पौड़ी के कुल 17 प्रशिक्षण केंद्रों में 15 दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। जीआईसी में आयोजित डीएलएड प्रशिक्षण की कार्यशाला में क्षेत्रीय निरीक्षक प्रदीप रावत ने डीएलएड के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्यक्रम सरकारी-गैरसरकारी विद्यालयों में कार्यरत अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिए अनिवार्य है। कार्यशाला में प्रशिक्षकों ने बताया कि विद्यालयों में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के अध्ययन के प्रारंभिक शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रम का उद्देश्य प्रारंभिक स्तर के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की व्यवसायिक कुशलताओं, अभिरूचियों तथा शिक्षण अधिग्रहण प्रक्रिया को अधिक प्रवाभिक बनाने के लिए व्यवसायिक विकास करना है।ऌ डीएलएड योजना के तहत जनपद में 1700 प्रशिक्षुकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस अवसर पर कोऑर्डिनेटर (प्रधानाचार्य) जीसी खर्कवाल, सह कोऑर्डिनेटर सुदीप जखवाल, डा. जितेंद्र नेगी, मुकेश रावत, योगेश जखमोला आदि उपस्थित रहे।