कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग ने बस अड्डे से कांजल मैपल बेचने वाले मुख्य तस्कर को धर दबोचा। वह मेरठ डिपो की बस में सवार होकर भागने के फिराक में था। इससे पहले चार मार्च को प्रतिबंधित लकड़ी कांजल मैपल को काटने के मामले में पांच तस्कर पकड़े गए थे।
लैंसडौन रेंज अधिकारी पूनम कैंथोला ने बताया कि चार मार्च को सतपुली पुलिस और लैंसडौन रेंज के वन कर्मियों ने सतपुली बैरियर से पांच तस्करों को कांजल की 317 किलो लकड़ी के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसकी कीमत करीब चार लाख रुपये बताई गई थी। इसके साथ ही लकड़ी लाने में उपयोग हुई कारों को सीज किया गया था। तस्करों में से एक के मोबाइल में से मुख्य आरोपी की वीडियो और फोटो मिले थे। उसी हुलिए के बाद उसको पकड़ने के लिए टीम का गठन कर कार्रवाई की गई थी।
सोमवार शाम करीब छह बजे मुखबिर की सूचना पर वन विभाग की टीम में शामिल जांच अधिकारी डिप्टी रेंजर अनुराग जुयाल और वन आरक्षी कुलदीप सिंह ने बस अड्डे पर बसों को छानना शुरू कर दिया। मेरठ डिपो की बस में उन्हें भागने की फिराक में मुख्य तस्कर जिला हुम्ला ग्राम हैप्का नेपाल निवासी पेमा तंडुप पुत्र डाबला तमांग बस में बैठा हुआ दिख गया। वन कर्मियों को अपने करीब आते देख तस्कर ने भागने की कोशिश की, लेकिन वन कर्मियों ने उसे दबोच लिया।
पूछताछ में तस्कर पेमा तंडुप ने बताया कि वह कांजल के पेड़ से लकड़ी के टुकड़े करके कट्टों में भरकर सहारनपुर खैरात में ले जाता था। जहां उसे प्रति लकड़ी का टुकड़ा दो हजार रुपये मिलता था। सहारनुर से उसे नेपाल, भूटान आदि स्थानों में मंहगे दाम पर बेचा जाता था। रेंज अधिकारी ने बताया कि तस्कर के खिलाफ वन अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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