कालागढ़/कोटद्वार। एनजीटी के आदेश पर कालागढ़ में जिला प्रशासन द्वारा खाली कराया रामगंगा परियोजना बांध का इलाका कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद शुक्रवार को केंद्रीय कालोनी के बड़े भूभाग की जेसीबी मशीन से हदबंदी कर दी गई। वन विभाग द्वारा कब्जे में ली गई जमीन के चारों ओर जेसीबी से गहरी खुदाई के बाद रविवार को लगने वाले हाट बाजार पर भी संकट पैदा हो गया है।
रेंज अधिकारी आरके भट्ट का कहना है कि वन विभाग बांध परियोजना से मिली भूमि की सुरक्षा के लिए यह कदम उठा रहा है। हदबंदी के बाद अब कालागढ़ में हर रविवार को लगने वाले पीठ बाजार पर असमंजस बना हुआ है। रामगंगा बांध परियोजना के कर्मचारियों के परिवारों के लिए 1968 से साप्ताहिक रविवार बाजार लगता आ रहा है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने शुक्रवार को पीठ मैदान की हदबंदी के लिए जेसीबी से चारों ओर से ऐसी खुदाई कर दी है कि कोई भी उसके अंदर प्रवेश न कर सके।
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क्या है रामगंगा परियोजना की कालोनी का मामला
रामगंगा बांध परियोजना का निर्माण 1960 से 1974 के बीच किया गया था। सबसे पहले पुराना कालागढ़ में आवासीय और अनावासीय भवनों का निर्माण किया गया था। बाद में केंद्रीय कालोनी और नई कालोनी में लगभग छह हजार आवासीय भवनों का निर्माण किया गया। कर्मचारियों को सुविधाएं देने के लिए बृहस्पतिवार को पुराना कालागढ़, रविवार को केंद्रीय कालोनी और बुधवार को नई कालोनी में साप्ताहिक पीठ बाजार का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूरदराज के किसान ताजी सब्जी, दाल, राशन और मसाले बेचने आते हैं। इस मैदान में विकास खंड दुगड्डा की ओर से नौ सब्जी फड़ों का निर्माण कराया गया था, जो ध्वस्तीकरण के बाद नष्ट हो चुकी हैं।