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मरीज की मौत से गुस्साएं परिजनों ने काटा हंगामा, डॉक्टर से मारपीट

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कोटद्वार। राजकीय बेस अस्पताल में रविवार रात को एक मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने इसे डाक्टर की लापरवाही बताते हुए अस्पताल में हंगामा किया और डॉक्टर से मारपीट करनी शुरू कर दी। सोमवार की सुबह घटना के विरोध में अस्पताल के सभी डाक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने कार्य बहिष्कार किया। अस्पताल के पूरे स्टाफ ने अस्पताल से कोतवाली तक जुलूस निकालते हुए कोतवाली में तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उधर, मृतक के परिजनों ने कहा कि वे भी जल्द ही संबंधित डाक्टर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
बेस अस्पताल के सीएमएस डा. आरएस चौहान ने बताया कि रविवार रात साढ़े सात बजे बेस अस्पताल की इमरजेंसी में पदमपुर निवासी जगत सिंह रावत (58) पुत्र रघुनाथ सिंह बुखार और सीने में दर्द को लेकर इलाज कराने आया था। इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात अस्पताल के सर्जन डा. सतीश कुमार ने उनका उपचार किया और रात आठ बजे मरीज को भर्तीकर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद करीब 8 बजकर 55 मिनट पर मरीज की वार्ड में ही मौत हो गई। पूर्व सैनिक जगत सिंह रावत की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए, उन्होंने नाते रिश्तेदारों को इसकी सूचना दी और अस्पताल पहुंच गए। रात के करीब साढ़े दस बजे इस मामले को डाक्टर की लापरवाही बताते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामे को देेखकर सीएमएस मौके पर पहुंचे, उनके समझाने के बाद भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। लोगों ने सीएमएस पर संबंधित डाक्टर को बुलाने का दबाव बनाते हुए मृतक के शव को अस्पताल से नहीं उठाने की चेतावनी दी। आखिर में सीएमएस ने डाक्टर आवास से डा. सतीश कुमार को मौके पर बुलाया। इस बीच डॉक्टर और लोगों के बीच जगत सिंह की मौत को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। बहस पहले धक्का मुक्की और उसके बाद मारपीट में बदल गई। मरीज के परिजनों ने डॉक्टर के साथ अभद्रता की। बाद मेें किसी प्रकार बीच बचाव कर मामला शांत किया गया।
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घटना की निंदा
कोटद्वार। डाक्टरों ने घटनाक्रम की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। कोतवाल मनोज रतूड़ी ने तहरीर लेते हुए कर्मचारियों को मामले में मुकदमा दर्ज कने के निर्देश दिए। इसके बाद डाक्टर एसडीएम के पास पहुंचे और उन्होंने मारपीट की घटना की शिकायत करते हुए डाक्टरों की सुरक्षा और अस्पताल में पुलिस पिकेट खोलने की मांग की।

चार घंटे तक ओपीडी रही ठप, मरीज रहे परेशान
कोटद्वार। रविवार को ओपीडी बंद होने के कारण सोमवार को भीड़ अधिक रही। लोग सुबह सात बजे से लाइन में लग गए। लेकिन, डाक्टरों के निर्धारित सयम में ओपीडी में नहीं पहुंचने के कारण लोग परेशान रहे। चिकित्सकों के आंदोलन पर चले जाने के कारण सक्षम मरीजों ने महंगे दाम पर प्राइवेट क्लीनिकों में अपना इलाज कराया, वहीं गरीब मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दर्द से कराहते मरीजों को करीब चार घंटे तक डाक्टरों का इंतजार करना पड़ा। चार घंटे के बाद डाक्टरों के ओपीडी कक्ष में लौटने पर लोगों ने चैन की सांस ली।

मृतक के परिजनों ने लगाया डाक्टर पर लापरवाही बरतने का आरोप
कोटद्वार। मृतक जगत सिंह के भतीजे ऋतुराज रावत ने बेस अस्पताल के डॉक्टर पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कहा कि डाक्टर ने ठीक से न तो मर्ज को समझा, न ही उपचार किया। कहा कि डाक्टर की लापरवाही के कारण मरीज की जान गई। हार्ट में दर्द के बावजूद न तो फिजीशियन बुलाया गया और ना ही ईसीजी कराई गई। ब्लॉकेज को खोलने के लिए इंजेक्शन लगाने के बजाए उन्हें ग्लूकोज के साथ गैस और सामान्य दर्द का इंजेेक्शन देकर भर्ती किया गया। समुचित इलाज नहीं मिलने के कारण एक घंटे के अंदर मरीज की मौत हो गई। कहा कि वह संबंधित डाक्टर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
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रविवार को दो बजे से आठ बजे तक वह इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात थे। करीब साढ़े सात बजे पदमपुर निवासी मरीज जगत सिंह उनके पास बुखार और सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचा। उन्होंने मरीज को कभी हार्ट की बीमारी होने की जानकारी मांगी थी। जिसपर मरीज ने प्राइवेट क्लीनिक में इलाज के दौरान ईसीजी टेस्ट में सब सामान्य होने की बात कही। इसलिए उन्होंने उसका सामान्य इलाज किया और भर्ती कर दिया था। भीड़ में से दो लोगों ने उनके साथ मारपीट की और गालीगलौज के साथ धमकी दी है।
डा. सतीश कुमार, सर्जन बेस अस्पताल कोटद्वार
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