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वन पंचायतों का विकास नहीं होने से हो रहा जंगलों से मोह भंग

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कोटद्वार/दुगड्डा। कार्बेट लैंड स्कीम के तहत आरक्षित वन पंचायतों के सर्वेक्षण के लिए कोटद्वार और दुगड्डा में बैठक का आयोजन किया गया। पीसीसीएफ वन पंचायत राजीव भरतरी के निर्देश पर सांख्यिकी विभाग ने वन पंचायतों से आवश्यक सूचना एकत्र की। ग्रामीणों ने जंगली जानवरों की दहशत को पलायन का मुख्य कारण बताया।
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कोटद्वार के पनियाली और दुगड्डा रेंज कार्यालय में डीएफओ वैभव सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वन पंचायत से जुड़े लोगों ने डीएफओ के समक्ष जंगल की पूर्व व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले जंगलों से उन्हें हक-हकूक मिलता था। इसके चलते लोगों का जंगल से लगाव रहता था। लोग जंगलों की आग बुझाते थे, लेकिन वर्तमान में यह सब बंद होने के कारण जंगल धधक रहे हैं। वन पंचायतों को बजट नहीं मिलने के कारण गांव के चारों ओर लैंटाना झाड़ियां उगी हुई हैं, जिसके चलते जंगली जानवर उनकी खेती को चौपट कर रहे हैं और ग्रामीणों पर हमले कर रहे हैं। जानवरों के हमलों और खेती चौपट होने के कारण गांव से लगातार पलायन हो रहा है।
डीएफओ वैभव सिंह ने कहा कि 2018 में वन पंचायतों का पुनर्गठन किया जाना है। इस संबंध में वन पंचायतों के गठन, गतिविधियों, लेखा, योजनाओं की मूलभूत सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं। पंचायत वनों में वन्य जीवों का प्रबंधन किया जाएगा। पंचायती वनों पर आधारित आजीविका विकास के अवसर की तलाश की जाएगी। उन्होंने सरपंचों को वन पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों और लंबित मामलों के निस्तारण के लिए प्रयास किए जाने का आश्वासन दिया।
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इस अवसर पर वन पंचायत के सांख्यिकी अधिकारी डा. प्रणवपाल कौशिक, अपर सांख्यिकी अधिकारी ललित मोहन सिंह, सरपंच सुशीला देवी, पूनम देवी, विमला देवी, शकुंतला देवी, शोभा देवी, दर्शनी देवी, रेंज अधिकारी कोटद्वार आरपी पंत व रेंज अधिकारी दुगड्डा किशोर नौटियाल आदि मौजूद थे।
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