धुमाकोट। साहित्यिक, सामाजिक संस्था धाद की ओर से जीआईसी धुमाकोट में कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें कवियों ने पलायन, राजधानी गैरसैंण, महिला सशक्तिकरण आदि मुद्दों पर अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। साथ ही नेताओं और सरकारी व्यवस्थाओं पर तंज कसे।
साहित्यकार लोकेश नवानी की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन की शुरुआत नवोदित कवयित्री पायल उनियाल ने अपनी रचना ’मोबैल मा कट्ठा ह्वै जांद तैला मैला ख्वाल, पर क्वी कट्ठा नि हूंदा कबि चौक मां.., के जरिये सिर्फ मोबाइल पर सिमटते संबंधों पर तंज कसा। दर्शन सिंह बिष्ट ने कहा कि’ फिकर नि कैरो साब लोगो, अच्छा दिन आंणा छन, लोग मरणा छन भूखा अर नेता ताली बजाणा छन...राजनीति पर व्यंग्य कसा। रिद्धि भट्ट ने महिला सशक्तिकरण पर अपनी कविता सुनाते हुए कहा-पैढ़ बेटी पैढ़ बेटी, अगनै अगनै बैढ़ बेटी.. कविता सुनाकर बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया।
शिवदयाल शैलज ने भगवान त्यारा खेल न्यारा छन, बिज्यां लोग सिंयां लोगों का सारा छन.., डा. जगदंबा कोटनाला ने राजधानी गैरसैंण की मांग पर एक जागरण गीत प्रस्तुत किया। संगीता ध्यानी ने लोकभाषा ते बचाणो आंदोलन चलाणा छां... और कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध भी एक रचना प्रस्तुत की। नरेंद्र गोनियाल व महेंद्र विद्यालंकार व धर्मेंद्र नेगी ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। गोष्ठी के अंत में लोकेश नवानी ने डाडों मा एक चिलंगु चा, माछु कनै जि जाव..’ कविता के साथ ही अन्य रोमांचक कविताएं प्रस्तुत की। मंच संचालन महेंद्र ध्यानी, मलकीत रौथाण और डा जगदंबा कोटनाला ने किया।