कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से बनाई गई हाथी सुरक्षा दीवार को गिरे चार माह का समय हो चुका है, लेकिन विभाग ने इसकी अभी मरम्मत नहीं की। अब जंगल से हाथी के आबादी में घुसने का खतरा बना हुआ हैै। लोगों ने इस पर नाराजगी व्यक्त की है।
वर्ष 2016 में लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से करीब 80 लाख रुपये की लागत से 1820 मीटर हाथी सुरक्षा दीवार बनाई गई थी। तीन अगस्त को क्षेत्र में हुई भारी बारिश से जंगल से आए मलबे ने शिवपुर-घराट मार्ग पर बनी 37 मीटर सुरक्षा दीवार को तोड़ दिया। तब से आज तक विभाग हाथी सुरक्षा दीवार के निर्माण को लेकर लापरवाह बना हुआ है। हाथी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण जंगल से हाथी धमकने का खतरा बना हुआ है।
कोटद्वार निवासी पूर्व डीआईजी बलराम सिंह नेगी, राकेश काला, रामेश्वर प्रसाद व महेश देवरानी ने हाथी सुरक्षा दीवार की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। कहा कि हाथी जैसे शक्तिशाली जानवर को रोकने के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार पानी के धक्के से गिर गई। कहा कि सुरक्षा दीवार को टूटे चार माह हो गए हैं, लेकिन अभी इसकी मरम्मत नहीं हो पाई है। दीवार के पार ग्राम पंचायत शिवपुर, मानपुर और लालपुर की घनी आबादी है। ऐसे में हाथी-मानव संघर्ष का अंदेशा बना हुआ है। विभाग से शिकायत करने के बाद भी सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं कराया जा रहा है।
उधर, लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ संतराम ने बताया कि उन्हें हाथी सुरक्षा दीवार टूटने की जानकारी है। उसकी शीघ्र मरम्मत कराई जाएगी, तब तक हाथी को रोकने के लिए जंगल की ओर से खाई खुदवाई जाएगी।
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