कोटद्वार। उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने वर्ष 2001 के बाद नियुक्त हुए शिक्षकों को डीएलएड और ब्रिज कोर्स प्रशिक्षण से मुक्ति दिलाने की मांग की है। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री और माध्यमिक शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर डीएलएड और छह माह के ब्रिज कोर्स के प्रशिक्षण से मुक्ति देने की मांग की है।
यहां हुई बैठक में उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री दीपक नेगी ने कहा कि राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में करीब 20 हजार ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें सरकार द्वारा एनसीटीई से मान्यता की प्रत्याशा में राज्य के शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में छह माह का विशिष्ट प्रशिक्षण दिलाया गया है। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर द्वारा विधिवत परीक्षा के आयोजन, परिणाम की घोषणा और प्रमाणपत्र दिए जाने के बाद इन सभी शिक्षकों को सरकार नेप्रशिक्षित वेतनमान पर नियुक्त किया। अब तक ये सभी शिक्षक अपनी तीन से 17 साल तक की सेवाएं सरकार को दे चुके हैं। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुसार तीन सितंबर 2001 के बाद उत्तराखंड राज्य में नियुक्त करीब बीस हजार शिक्षक सिर्फ इस कारण अप्रशिक्षित एवं अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं, क्योंकि सरकार स्वयं द्वारा चलाए गए विशिष्ट बीटीसी की एनसीटीई से मान्यता प्राप्त करने में विफल रही है। राज्य सरकार के इस कामचलाऊ रवैये का खामियाजा निर्दोष शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्हें बार-बार प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है। बैठक में ब्लाक अध्यक्ष कमलेश कंडारी, मधुसूदन हिंदवान, राजेंद्र पाल, अजीम हैदर नकवी, संजय कुमार, दीपक सजवान, अनिल भट्ट आदि मौजूद रहे।