कोटद्वार। अमर उजाला के अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल महाभियान के तहत कोटद्वार के डीएवी पब्लिक स्कूल में महिला सशक्तिकरण विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें 12वीं की 36 छात्राओं ने महिलाओं के जीवन से जुड़े विभिन्न आयामों को अपने रंगों के माध्यम से पेपर पर उकेरने का सफल प्रयास किया।
मंगलवार को डीएवी पब्लिक स्कूल कोटद्वार में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण को बखूबी दर्शाया। उन्होंने अपनी पेंटिंग में महिलाओं के अधिकार, महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा, कार्यालयों में महिलाओं के साथ हो रहा बुरा बर्ताव, यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता, सामाजिक ताना बना से बेड़ियों में जकड़ी महिला, हां महिलाएं कर सकती हैं, राष्ट्र की प्रगति में सहायक महिला, शिक्षित महिला ही कर सकती है शिक्षित समाज की स्थापना, अपमान मत कर नारी का इनके बल पर जग चलता है, जहां महिला की पूजा होती है, वहां भगवान का वास होता है, समाज के हिसाब से ढल जाती है नारी, जब जब नारी पर अत्याचार होता है, तब तब वह बाढ़ की तरह पूरे समाज को अपने में समा लेती है आदि अनेक स्लोगन लिखी पेंटिंग्स बनाईं। उनकी पेंटिंग में महिलाओं के उत्थान को लेकर चिंता दिखाई दी, वहीं उन्होंने अपनी चित्रकला के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों और उन्हें निर्भीकता के साथ खुले आसमान में जीने का अधिकार दिए जाने की बकालत की।
एक घंटे तक चली चित्रकला प्रतियोगिता में 12वीं कक्षा की छात्राओं ने निर्धारित एक घंटे में अपनी पेंटिंग्स पूरी की। इसके बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य अशोक शर्मा ने छात्राओं से उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आज के समय में महिलाएं अबला नहीं रह गई हैं। आज देश और विदेश की बड़े संस्थानों में महिलाएं अग्रणी भूमिका निभाते हुए देश की तरक्की मेें सहायक बन रही हैं।
निर्णायकों द्वारा दिए गए अंकों के आधार पर छात्रा वंशिका बडोला को नारी शिक्षा, नारी अधिकार पर आकर्षित पेंटिंग के लिए पहला स्थान दिया गया। छात्र इशिका अग्रवाल केे यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता.. की सुंदर पेंटिंग के लिए द्वितीय और छात्रा अर्चना जोशी को सामाजिक बंधनों और बुराइयों में जकड़ी भयभीत महिला की बेहतरीन पेंटिंग के लिए तृतीय स्थान दिया गया। कार्यक्रम में शिक्षक डा. विपिन कुमार और डा. निहारिका अग्रवाल ने सहयोग दिया।
महिला सशक्तिकरण पर बोली छात्राएं
महिलाओं को उनके पूरे अधिकार देने होंगे। उनको भी जागरूक होने की जरूरत है। तभी जाकर महिला सशक्तिकरण की कल्पना की जा सकती है।
-वंशिका बडोला
लोगों को अपनी पत्नी व बेटी का अपमान नहीं करना चाहिए। महिलाओं को अगर अपने घर से ही सम्मान मिलेगा तो वे एक बेहतर समाज की स्थापना कर सकती हैं। उन्हें सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलना चाहिए।
-इशिका अग्रवाल
लड़कियों को बोझ नहीं समझना चाहिए। उन्हें अगर सही शिक्षा और मार्गदर्शन मिले तो वे बड़ी होकर अपने पूरे परिवार की देखभाल कर सकती हैं। बेटियां बेटों से कमतर नहीं हैं।
-पायल गुप्ता
महिलाओं को हर क्षेत्र में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उनको घर की चाहरदीवारी में कैद न करें, उन्हें भी आजादी से जीने का हक है। उन्हें उनका अधिकार दें।
-समीक्षा लखेड़ा।
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