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लोकभाषा के संरक्षण में जनसहभागिता जरूरी

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कोटद्वार। धाद लोकभाषा एकांश और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर दो दिवसीय भाषा विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकभाषाओं के संरक्षण में जनसहभागिता की जरूरत विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में बीएड के छात्र-छात्राओं बढ़-चढ़कर भाग लिया।
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मंगलवार को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के बीएड विभाग में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ धाद संस्था के अध्यक्ष जगमोहन सिंह बिष्ट ने किया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा किसी भी इंसान को गर्व महसूस कराती है। कहा कि मातृभाषा एक ऐसी भाषा होती है, जिसे सीखने के लिए किसी बच्चे को किसी कक्षा की जरूरत नहीं पड़ती। आज विश्व में कई ऐसी भाषाएं और बोलियां हैं, जिनका संरक्षण आवश्यक है। लोकभाषाओं की चिंता इसलिए जरूरी है कि ये हमारी विरासत का एक भाग हैं, जिसे सहेजकर रखा जाना जरूरी है। इसके लिए 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि 21 फरवरी को बद्रीनाथ मार्ग स्थित प्रेक्षागृह में गढ़वाली गजल और नाटक का आयोजन किया जाएगा।
उधर, मोटाढांक स्थित बाल भारती पब्लिक स्कूल में धाद लोकभाषा एकांश और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से निबंध एवं कविता लेखन पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि जनार्द्धन प्रसाद बुड़ाकोटी ने किया। कार्यक्रम में कोटद्वार क्षेत्र के विद्यालयों से 200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। अजीम फाउंडेशन के रिसोर्स पर्सन संजय नौटियाल ने विज्ञान एवं गतिविधियों को दूर करने संबंधी विधियों पर विचार रखे। इस मौके पर संस्था के सचिव राकेश मोहन ध्यानी, जगमोहन सिंह कठैत, डा. जगदंबा कोटनाला, खजान सिंह, राजेश खत्री पंकज ध्यानी व राजीव थपलियाल आदि मौजूद रहे।
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